आदर्श चम्पावत की परिकल्पना हो रही साकार: कृषि विभाग की चैन लिंक फेंसिंग योजना से जंगली जानवरों के आतंक से मुक्त हुए ठाठा ग्राम के किसान।

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चंपावत 17 जून 2026

*आदर्श चम्पावत की परिकल्पना हो रही साकार: कृषि विभाग की चैन लिंक फेंसिंग योजना से जंगली जानवरों के आतंक से मुक्त हुए ठाठा ग्राम के किसान*

*’आदर्श चम्पावत’ की ओर बढ़ते कदम, कृषि विभाग ने फेंसिंग कर किसानों को जंगली जानवरों के आतंक से दिलाई मुक्ति*

माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के ‘आदर्श चम्पावत’ की परिकल्पना को हर क्षेत्र में धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है। पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ कृषि के क्षेत्र में भी विकास कार्यों को लगातार गति मिल रही है।

इसी क्रम में, जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार के कुशल दिशा-निर्देशों के अनुपालन में कृषि विभाग द्वारा जनपद के विकासखंड लोहाघाट के अंतर्गत ग्राम ठाठा में जिला योजना और मनरेगा के युगपतिकरण (कन्वर्जेंस) के माध्यम से चैन लिंक फेंसिंग (तारबाड़) का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है।

ग्राम ठाठा की भौगोलिक स्थिति और कृषि परिदृश्य की विस्तृत जानकारी देते हुए मुख्य कृषि अधिकारी श्री धनपत कुमार ने बताया कि लोहाघाट विकासखंड में स्थित यह गांव प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर एक कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहाँ निवास करने वाले लगभग 60 से 65 परिवार 75.184 हेक्टेयर भूमि पर कृषि कार्य कर रहे हैं। यहाँ की जलवायु और उपजाऊ भूमि मंडुवा, दलहन, मक्का तथा विभिन्न सब्जियों के उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है, जिससे अधिकांश ग्रामीणों की आजीविका खेती और पशुपालन पर ही निर्भर है। कृषि विभाग द्वारा यहाँ सिंचन क्षमता बढ़ाने के लिए पूर्व में 04 जियो लाइन टैंकों का निर्माण कराया गया है और खेती में मानव श्रम को कम करने के उद्देश्य से 01 फार्म मशीनरी बैंक की भी स्थापना की गई है।

अपार संभावनाओं के बावजूद, चारों तरफ से जंगलों से घिरे होने के कारण इस गाँव के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। जंगली जानवरों द्वारा फसलों को लगातार नष्ट किए जाने से किसानों का रुझान खेती के प्रति कम होने लगा था और उन्हें अपनी मेहनत का वांछित लाभ नहीं मिल पा रहा था। कृषकों की इस गंभीर और दीर्घकालिक समस्या के स्थायी समाधान के लिए कृषि विभाग ने ठोस कदम उठाते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिला योजना और मनरेगा के समन्वय से ठाठा गाँव में 600 मीटर लंबी सुरक्षात्मक घेरबाड़ (फेंसिंग) का निर्माण कार्य पूरा किया।

इस फेंसिंग निर्माण के उपरांत अब क्षेत्र में जंगली जानवरों द्वारा फसलों को पहुँचाए जाने वाले नुकसान में भारी कमी आई है। सुरक्षा का माहौल बनने से किसानों को जहाँ अपनी हाड़-तोड़ मेहनत का पूरा प्रतिफल मिल रहा है, वहीं अब वे उच्च मूल्य वाली नकदी फसलों, सब्जियों और फलोत्पादन की ओर तेजी से प्रोत्साहित हो रहे हैं।

इस सफल प्रयास से न केवल फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है, बल्कि कृषि में निवेश बढ़ने, पूर्व में परती व अनुपयोगी पड़ी भूमि को दोबारा कृषि योग्य बनाने, कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और कृषकों की आय में वृद्धि कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।

Jaya punetha editor in chief ।