मानेश्वर समाचार।
13 अगस्त 2025
चार बच्चों की गरीब विधवा मां ने स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि, उसका डीएम इतना मान – सम्मान देकर काम कर देंगे।
अपना दुखड़ा लेकर पहली बार कलेक्ट्रेट आई सुदूर गांव की जानकी भूल गई डीएम के व्यवहार से अपना दुख दर्द।
चंपावत। तल्लादेश के नीड गांव की चार बच्चों की विधवा मां आज तमाम आशाओं को लेकर यहां कलेक्ट्रेट पहुंची थी। सुदूर गांव की अनुसूचित जाति की इस महिला को किसी ने बताया था कि कलेक्ट्रेट में ऐसे साहब आए है जो गरीबों की दिक्कतों को सुन रहे हैं। पूछताछ करते हुए जब वह कलेक्ट्रेट पहुंची तो दरवाजे में एक महिला व दुधमुंही बच्ची व एक बच्चे के साथ बैठी हुई थी।इसकी जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने उसे तुरंत बुलवाया तथा उसकी समस्या पूछी। दिनभर की भूखी प्यासी इस महिला को आगे खाना व बच्चे को दूध पिलाकर उनसे आने का कारण पूछा तो जिलाधिकारी की मानवीय संवेदना उमड़ पड़ी। उसी वक्त उसकी विधवा पेंशन स्वीकृत कराई गई।जिसके लिए वह दर-दर भटक रही थी। यही नहीं इस महिला को आर्थिक सहायता देने के लिए मुख्यमंत्री को अपनी संस्कृति भी भेजी गई। जिलाधिकारी ने कहा यदि उनके पास मकान नहीं होगा तो उसकी भी सुविधा दी जाएगी। तीन बेटी व एक बेटे की मां जानकी के ऊपर से एक वर्ष पूर्व पति का साया उठ गया था, तब से उसके पारिवारिक जीवन में वज्रपात हो गया, तथा वह एक-एक दाने के लिए तरस रही थी। पहली बार कलेक्ट्रेट आई इस अभागिन से जिलाधिकारी ने मानवता के नाते जो आत्मीय व्यवहार किया उसे देखकर न केवल वह अबाक रह गई बल्कि अपना दुख दर्द भी भूल गई। उसने जिलाधिकारी के बारे में जो सुना था उससे अधिक उसे मान और सम्मान मिला। जिलाधिकारी ने अपना फोन नंबर उसे देते हुए कहा कि वह भविष्य में यहां आने के बजाय फोन पर ही अपनी समस्या बता सकती है,उनकी पूरी मदद की जाएगी।जिलाधिकारी को इस बात की हैरानी थी कि ऐसे ही लोगों के लिए पूरा तंत्र बना हुआ है, लेकिन जानकी को अपनी पीड़ा बताने के लिए इतनी दूर अपना समय व धन खर्च कर आना पड़ा। जबकि जिस विभाग को इनकी मदद करनी थी। उनके लिए सरकार ने गाड़ी, घोड़ा सब कुछ दिया है।
Jaya punetha editor in chief ।




