पंचेश्वर में हुई आपदा में ऐसे समर्पण भाव से उत्तरदायित्व का निर्वाह, मानवीय संवेदना एवं जिम्मेवारी के साथ बचाव व राहत कार्य लोगों ने नहीं देखे थे पहले।

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मानेश्वर समाचार।

27 अगस्त  2025

पंचेश्वर में हुई आपदा में ऐसे समर्पण भाव से उत्तरदायित्व का निर्वाह, मानवीय संवेदना एवं जिम्मेवारी के साथ बचाव व राहत कार्य लोगों ने नहीं देखे थे पहले।

जिलाधिकारी मनीष कुमार की “क्विक एक्शन” की कार्य संस्कृति के कारण आपदा में राहत व बचाव कार्य में लगा रहा पूरा प्रशासन तंत्र।

चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मॉडल जिले में सब कुछ वही पुराना है, लेकिन अफसरो का काम करने का तौर तरीका सोच एवं कार्य संस्कृति में ऐसा बदलाव आ गया है कि आपदा की चपेट में आए 18 वर्षीय लक्ष्मण चंद भले ही संसार से अलविदा हो गया। लेकिन उसके जीवन को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी पूरी शक्ति व सामर्थ लगा दी थी। यहां तक की घायल को देहरादून ले जाने के लिए एयरलिफ्ट करने हेतु किमतोली गांव में बाकायदा हेलीकॉप्टर भी उतर चुका था। आपात स्थिति में लोगों के जान माल को बचाने के लिए ऐसा युद्ध स्तर पर तगड़ा बंदोबस्त लोगो ने पहले कभी नहीं देखा। जिसमें मौके में ही पीएम, मृतक के शव को परिजनों को सौंपने के समय ही चार लाख की सहायता का चेक देना तथा डेडबॉडी के साथ परिजनों को सरकारी वाहन से उन्हें सम्मान पूर्वक उनके घर तक छोड़ने की सारी ऐसी व्यवस्थाएं की गई थीं, कि शोकाकुल परिवार को भले ही अपने बच्चे को खोने का मलाल जीवन भर रहेगा। लेकिन उन्हें जिला प्रशासन की मानवीय संवेदनशीलता एवं दिल से उन्हें दिए गए सहयोग को वह कभी नहीं भूल सकते। स्वयं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देवेश चौहान अपने पूरे तंत्र को लेकर मौके में पहुंचे हुए थे। यहां के बुजुर्गों का कहना था कि यहां पहले हुई रोडवेज बस दुर्घटना में सभी दो दर्जन यात्रियों ने मौके में ही कफ़न ओड लिया था। तब भी ऐसा राहत व बचाव कार्य देखने को नहीं मिला।

 

प्रशासनिक तंत्र में यह बदलाव जिलाधिकारी मनीष कुमार की “क्विक एक्शन, क्विक डिसीजन एवं क्विक रिस्पॉन्स ” की कार्य संस्कृति से आया है । भले ही जिलाधिकारी इस बीच निजी कारणों से अवकाश पर जिले से बाहर है। लेकिन घटना का समाचार मिलते ही वह लगातार जिला प्रशासन और राज्य सरकार के संपर्क में रहे, तथा बचाव राहत कार्य की मॉनिटरिंग करते रहे। पहली बार किसी पीड़ित परिवार को इतनी जल्दी मौके में ही राहत सहायता मिली। जबकि आज तक ऐसी घटनाएं होने पर हफ्तों तक खूब पापड़ बेलने के बाद यह राशि मिला करती थी। उसमें भी उसे बांटने के लिए नेताजी के आने का इंतजार किया जाता था। यह भी पहली बार देखने को मिला कि किसी गरीब व्यक्ति के दुर्घटना में घायल होने के बाद उसके जीवन को बचाने के लिए जिलाधिकारी की पहल पर मुख्यमंत्री द्वारा यहां किमतोली में हेलीकॉप्टर उतार दिया गया। यह बात अलग है कि तब तक जिस घायल को ले जाने के लिए वह आया था तब तक वह अंतिम सांस ले चुका था।

जिलाधिकारी ने प्रशासन तंत्र को इतना जवाबदेह बना दिया है कि अब अपने कार्यों को “लटकाने, टरकाने और लोगों को गुमराह करने” का दौर अतीत की बातें हो गई है। टनकपुर पिथौरागढ़ राजमार्ग का ही उदाहरण है पहली बार इस मौसम में भारी वर्षा के बावजूद भी राजमार्ग 24 घंटे तक बंद नहीं रहा। चाहे दिन हो या रात सड़क मार्ग बंद होते ही जिलाधिकारी का स्पॉट में पहुंचना रहा है।

यही वजह है कि सड़क मार्ग बंद होने की स्थिति में रात भर उसे खोलने का कार्य पहली बार देखा गया है। जानकारो का कहना है कि अब मॉडल जिले के लोगों की तकदीर बदलने का समय आ गया है, जहां उनकी समस्याओं का तेजी के साथ निस्तारण करने वाला जिलाधिकारी आ गया है।

Jaya punetha editor in chief ।