जब तीर्थयात्रियों ने पुलिस जवान को कहा ‘भगवान का दूसरा रूप’, मौत के मुंह से सैकड़ों जिंदगियां खींच लाए गोताखोर रविंद्र कुमार।
पूर्णागिरि मेले में शारदा नदी के रक्षक बने जल पुलिस के जवान, सैकड़ों लोगों को डूबने से बचाकर जीता श्रद्धालुओं का दिल; राष्ट्रीय सम्मान की उठी मांग।
टनकपुर (चम्पावत)। मां पूर्णागिरि मेले में लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के बीच कुछ ऐसे भी नायक रहे, जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के अपनी जान जोखिम में डालकर सैकड़ों लोगों की जिंदगी बचाई। शारदा घाट पर तैनात जल पुलिस के गोताखोर रविन्द्र कुमार और उनकी टीम ने मेले के दौरान कई श्रद्धालुओं को मौत के मुंह से बाहर निकालकर नया जीवन दिया। यही कारण है कि बचाए गए तीर्थयात्रियों और उनके परिजनों ने उन्हें ‘भगवान का दूसरा रूप’ तक कह दिया।
शारदा नदी की तेज धाराओं और खतरनाक भंवरों के बीच ड्यूटी निभाने वाले रविन्द्र कुमार वर्षों से इस चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। बताया जाता है कि वह अब तक अकेले ही सैकड़ों लोगों को डूबने से बचा चुके हैं। इस बार मेले में उनके साथ हीरा सिंह भंडारी, पीआरडी जवान सूरज शर्मा और जल पुलिस के राकेश गिरी ने भी अहम भूमिका निभाई। गोताखोर रविन्द्र कुमार कहते हैं कि जब किसी डूबते हुए बच्चे को सुरक्षित निकालकर उसके माता-पिता के सामने खड़ा करते हैं, तब जो दुआएं मिलती हैं, उनकी कीमत किसी भी धन-दौलत से नहीं आंकी जा सकती। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की यही दुआएं उन्हें हर बार और अधिक साहस के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने बताया कि शारदा नदी की उफनती लहरों में उतरना स्वयं में जोखिम भरा होता है, लेकिन जब किसी डूबते व्यक्ति को बचाकर बाहर निकालना होता है, तब खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके बावजूद ईश्वर की कृपा और टीम की तत्परता से अब तक कोई बड़ी अनहोनी नहीं होने दी गई। रविन्द्र कुमार और उनकी टीम की सराहना जिला प्रशासन भी कर चुका है। जिलाधिकारी मनीष कुमार और पुलिस अधीक्षक रेखा यादव उनके साहसिक कार्यों की खुले मंचों से प्रशंसा कर चुके हैं। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं का कहना है कि मानव जीवन की रक्षा में असाधारण योगदान देने वाले ऐसे जांबाज जवानों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए।
Jaya punetha editor in chief ।




