वटवृक्ष की श्रद्धापूर्वक पूजा करने के बाद सुहागिन महिलाओं ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश।

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मानेश्वर समाचार

लोहाघाट। नगर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आज सुहागन महिलाओं ने उपवास रखकर श्रद्धापूर्वक अपने अखंड सुहाग की लंबी आयु एवं घर में सुख शांति समृद्धि की कामना तथा पर्यावरण संरक्षण के संरक्षण के संकल्प के साथ सुबह से ही सुहागिन महिलाओं द्वारा मांगलिक प्रधानों में सज धजकर वटवृक्ष में जलाभिषेक कर पूजा अर्चना कर अपनी मनौतियां मांगी। ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व चौबीसों घंटे ऑक्सीजन छोड़ने वाले पीपल वृक्ष जिसमें विष्णु भगवान का वास माना जाता है। यही वजह है कि हमारे पूर्वजों द्वारा अनादि काल से शुरू की गई इस परंपरा की सुहागिन महिला संवाहक बनी हुई हैं। चिड़ियाढूंगा गांव में भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य सतीश चंद्र पांडे के आवास में आचार्य दीपक पाठक ने वट सावित्री व्रत की कथा सुनाते हुए कहा कि जिस प्रकार वट वृक्ष को काटने से यमराज ने सत्यवान के प्राण लेने का प्रयास किया तथा उनकी धर्मपत्नी सावित्री द्वारा वटवृक्ष की सुरक्षा का संकल्प लेने के साथ ही यमराज को प्रसन्न कर अपना सुहाग पुनः प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की। यमराज ने सावित्री को आजीवन सौभाग्यशाली एवं समृद्धशाली रहने का वरदान दिया था। आज के समय में इसे पर्यावरण संरक्षण का एक जीवंत उदाहरण माना जा रहा है कि किस प्रकार हमारे पूर्वजों में प्रकृति की संरचना को बनाए रखने के लिए वृक्षों की पूजा एवं उनके संरक्षण की परंपरा को शुरू किया गया था। उधर आचार्य प्रकाश चन्द्र उपाध्याय के पौरोहित्य me पूर्ण विधि विधान के साथ चांदमारी में हर्षवर्धन जोशी के घर में सुहागन महिलाओं द्वारा पूजा अर्चना की गई।

 

 

फोटो चिड़ियाढूंगा गांव में वट सावित्री का पूजन करती महिलाएं।

Jaya punetha editor in chief संवाददाता पूजा भट्ट की रिपोर्ट।

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