श्रद्धा , सिद्धता और पवित्रता से मनाया गया ” श्रावणी उपाकर्म “।

मानेश्वर समाचार।

9 अगस्त 2025

श्रद्धा, सिद्धता और पवित्रता से मनाया गया “श्रावणी उपाकर्म”।

आत्म-शुद्धि, वेदों के अध्ययन की शुरुआत और ऋषियों के प्रति सम्मान का प्रतीक है यह त्योहार। वैदिक विधि विधान से होता है पूजन।खेतीखान। कानाकोट, सिरटोली, मुंगलेश्वर महादेव के मंदिर तट पर श्रावणी उपाकर्म का भव्य आयोजन किया गया। यह धार्मिक अनुष्ठान वेदाचार्य प्रकाश पाण्डेय के सानिध्य में वेदोक्त विधि विधान से सम्पन्न हुआ जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय जनों ने प्रतिभाग किया। श्रावणी उपाकर्म, जिसे रक्षा बंधन के नाम से भी जाना जाता है। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह मुख्य रूप से ब्राह्मणों द्वारा मनाया जाता है, लेकिन अन्य समुदायों में भी इसका खास महत्व है। यह त्योहार आत्म-शुद्धि, वेदों के अध्ययन की शुरुआत और ऋषियों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। श्रावणी उपाकर्म के मुख्य पहलू हैं:यज्ञोपवीत अर्थात जनेऊ बदलकर नई जनेऊ धारण करना है। इस दिन सनातनी अपनी यज्ञोपवीत बदलते हैं, जो एक प्रतीकात्मक कार्य है। यहां वेदों के ज्ञान को पुनः प्राप्त करने और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के संकल्प को दर्शाता है। इस दौरान संतानीय जन अपने पिछले कर्मों के लिए प्रायश्चित करते हैं और भविष्य में अच्छे कर्म करने का संकल्प लेते हैं। इतना ही नहीं इस दिन ऋषि-मुनियों का पूजन किया जाता है, जो ज्ञान और मार्गदर्शन के स्रोत माने जाते हैं।श्रावणी उपाकर्म के दौरान वेदों और शास्त्रों का अध्ययन किया जाता है। यह त्योहार परिवार और समुदाय के साथ मिलकर मनाया जाता है, जहां लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। श्रावणी उपाकर्म का महत्व न केवल धार्मिक है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है। यह त्योहार हमें अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की याद दिलाता है, और हमें आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

Jaya punetha editor in chief ।

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