जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्थानीय स्तर समिति की बैठक संपन्न, विशेष श्रेणी के दिव्यांगजनों के विधिक अभिभावक की नियुक्ति और पात्रता को लेकर हुई समीक्षा।

चम्पावत 27 जून 2026

*जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्थानीय स्तर समिति की बैठक संपन्न, विशेष श्रेणी के दिव्यांगजनों के विधिक अभिभावक की नियुक्ति और पात्रता को लेकर हुई समीक्षा*

जिला कार्यालय सभागार में जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत गठित स्थानीय स्तरीय समिति की बैठक का आयोजन किया गया।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ऑटिज़्म (Autism), सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy), मानसिक मंदता (Mental Retardation) और बहु-दिव्यांगता (Multiple Disabilities) से ग्रसित विशेष श्रेणी के दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विधिक अभिभावक (Legal Guardian) नियुक्त किए जाने के संबंध में कार्यों की समीक्षा करना और इस कल्याणकारी योजना को गति देना था।

बैठक के दौरान जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि उक्त विशेष श्रेणियों के दिव्यांग व्यक्तियों के विधिक अभिभावक नियुक्त किए जाने के संबंध में वर्ष 2025-26 में कुल दो आवेदन प्राप्त हुए थे। इन दोनों ही आवेदनों को स्थानीय स्तर समिति के सम्मुख प्रस्तुत कर, ग्रसित व्यक्तियों के लिए विधिक अभिभावकों की नियुक्ति करते हुए मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया है और वर्तमान में कार्यालय स्तर पर विधिक अभिभावक की नियुक्ति हेतु कोई भी नया आवेदन लंबित नहीं है।

अधिनियम के प्रावधानों और विधिक अभिभावक की आवश्यकता पर विस्तृत जानकारी देते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी आर एस सामंत ने बताया कि इन चार विशिष्ट प्रकार की दिव्यांगताओं से ग्रसित व्यक्ति बेहद विशेष और संवेदनशील स्थितियों में होते हैं। 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद भी ये व्यक्ति हमेशा अपने जीवन का प्रबंधन करने या अपने स्वयं के हित व बेहतरी के लिए कानूनी निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम नहीं हो पाते हैं।

इसलिए उन्हें अपने पूरे जीवनकाल में कानूनी क्षेत्रों में अपने हितों का सही प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी न किसी जिम्मेदार व्यक्ति के संरक्षण की आवश्यकता होती है।

राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 2000 के तहत इन श्रेणियों की दिव्यांगता धारित करने वाले निःशक्तजनों के लिए विधिक अभिभावक नियुक्त किए जाने की एक निश्चित प्रक्रिया और पात्रता निर्धारित है, जिसके तहत निःशक्त व्यक्ति के माता-पिता या उनका कोई संबंधी स्थानीय स्तर समिति को संरक्षक के रूप में काम करने के लिए आवेदन दे सकता है।

इसके अतिरिक्त, कोई भी पंजीकृत संगठन भी निःशक्तता वाले व्यक्ति के लिए एक संरक्षक की नियुक्ति हेतु निर्धारित फार्म में आवेदन करने के लिए अधिकृत है, बशर्ते कि ऐसे किसी आवेदन पर तब तक आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी जब तक कि निःशक्तता वाले व्यक्ति के संरक्षक से भी इस संबंध में स्पष्ट सहमति प्राप्त नहीं कर ली जाती है।

बैठक में जिलाधिकारी द्वारा जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए गए कि इस महत्वपूर्ण अधिनियम का जनपद में व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए ताकि समाज के अंतिम छोर पर बैठे पात्र लोगों को इसकी जानकारी मिल सके। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि निर्धारित समयावधि के भीतर प्रत्येक तिमाही में स्थानीय स्तर समिति की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए, जिससे प्राप्त होने वाले सभी नवीन आवेदनों का त्वरित और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके और किसी भी दिव्यांगजन के अधिकारों का हनन न हो।

इस बैठक में जिलाधिकारी के साथ मुख्य विकास अधिकारी डॉ जीएस खाती, जिला समाज कल्याण अधिकारी श्री आर एस सामंत और स्थानीय स्तर समिति के सदस्य श्री बृजेश जोशी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

Jaya punetha editor in chief ।

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