कल के लिए जल की चिंता आज नहीं की गई तो, वह दिन दूर नहीं जब हम एक-एक बूंद पानी के लिए जाएंगे तरस। 

मानेश्वर समाचार।

9 सितंबर 2025

कल के लिए जल की चिंता आज नहीं की गई तो, वह दिन दूर नहीं जब हम एक-एक बूंद पानी के लिए जाएंगे तरस।

“सारा” की बैठक में जल संरक्षण के लिए सभी सरकारी कार्यालय में बरसाती पानी के संग्रह करने के उपायों के लिए जिलाधिकारी ने दिए निर्देश।

चंपावत। कल के लिए जल की चिंता आज नहीं की गई तो वह दिन दूर नहीं जब हम एक-एक बूंद पानी के लिए तरस जाएंगे। सीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट हमारी आंखें खोलने के लिए काफी है जिसमें कहा गया है कि आजादी के वक्त प्रति व्यक्ति 6000 लीटर पानी की उपलब्धता थी जो सन 2000 में पहुंचते हुए 2300 घन मीटर में पहुंच गई तथा वर्तमान में यह मात्रा 1600 घन मीटर ही रह गई है। यह बात जिलाधिकारी मनीष कुमार ने “सारा” की बैठक में जल संरक्षण को लेकर हुई चर्चा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कृषि औद्योगिक एवं अन्य क्षेत्रों में लगातार पानी की मांग बढ़ती जा रही है। जहां थोड़ा भी पानी का रिसाव होता है वहां पानी के पोषक पौधों का रोपण किए जाने तथा पानी को बांधने से स्रोत स्वत रिचार्ज हो जाएंगे। नदियों, गाड़ गधेरों को स्वच्छ रखने की शुरुआत अपने घर से की जानी चाहिए आखिर यही पानी नदी में मिलता है। जिलाधिकारी ने आगाह किया कि जब गंगा और यमुना के उद्गम उत्तराखंड में अभी लोग जल संकट झेल रहे हैं तो इससे भविष्य की कल्पना की जा सकती है। इसके लिए हर स्तर पर जल संरक्षण, जल की बर्बादी रोकने एवं बरसाती जल के संग्रह को अपनाना होगा।उन्होंने प्रत्येक सरकारी कार्यालय में बरसाती जल के संग्रह करने के उपाय करने के भी निर्देश दिए

बैठक में कैसे भूगर्भीय जल को बढ़ाने के लिए चाल खालों का उपयोग करने गाड़ गधेरों व नदियों को स्वच्छ रखने बरसाती जल के संरक्षण के उपाय करने पर विशेष जोर दिया गया। यह कार्यक्रम केवल सरकारी न होकर इसके लिए हर घर से सोच पैदा की जानी चाहिए। बैठक में एडीएम जयवर्धन शर्मा, सीएमओ डॉ देवेश चौहान, पुलिस क्षेत्राधिकारी शिवराज सिंह राणा, लघु सिंचाई के अधिशाषी अभियंता विमल सुंठा, मुख्य कृषि अधिकारी धनपत कुमार सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

Jaya punetha editor in chief ।

 

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