खेत बने पाठशाला, किसान बने गुरु। उद्यान विभाग ने शुरू की किसानों के उत्थान की नई पहल।

खेत बने पाठशाला, किसान बने गुरु। उद्यान विभाग ने शुरू की किसानों के उत्थान की नई पहल।

प्रगतिशील किसानों के खेतों पर मिलेगा खेती का हुनर, लोहाघाट में शुरू हुई अनोखी पहल।

लोहाघाट। खेती को लाभकारी और आधुनिक बनाने की दिशा में लोहाघाट क्षेत्र में एक नई और प्रेरणादायक पहल शुरू हुई है। अब किसानों को सिर्फ कक्षाओं में नहीं, बल्कि सफल किसानों के खेतों पर ही खेती के गुर सिखाए जाएंगे। उद्यान विभाग की इस अभिनव पहल से नए किसानों को खेती का व्यावहारिक ज्ञान और सफल खेती के वास्तविक अनुभव एक ही मंच पर मिल सकेंगे। लोहाघाट ब्लॉक को कीवी, बेमौसमी सब्जियों, आलू, अदरक और हल्दी उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रहे उद्यान विभाग के एडीओ आशीष रंजन खर्कवाल का मानना है कि किसान स्वयं एक कुशल वैज्ञानिक होता है। खेतों में वर्षों तक काम करते-करते उसे मिट्टी, मौसम और फसलों का ऐसा अनुभव प्राप्त हो जाता है, जो किसी पुस्तक में नहीं मिल सकता।

इसी सोच के तहत क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों के खेतों को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां नए किसानों को पौधरोपण, कटाई-छंटाई, निराई-गुड़ाई, बागवानी प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस अभियान की शुरुआत सुई गांव के प्रगतिशील किसान रमेश चंद्र के कीवी व सेब के बगीचे से हुई। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान रमेश चंद्र ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और लगातार सीखने की ललक ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। उन्होंने किसानों को खेती में नवाचार अपनाने और धैर्य के साथ मेहनत करने का संदेश दिया।

एडीओ आशीष रंजन खर्कवाल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मेहनत और सही तकनीक का मेल खेती को रोजगार और समृद्धि का मजबूत आधार बना सकता है। उन्होंने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए नई जानकारियां सीखने की आदत विकसित करने पर विशेष जोर दिया। प्रशिक्षण शिविर में खैसकांडे, फोरती, मोत्युराज, ढोंरजा, खतेडा, गंगनौला सहित कई गांव के किसानों ने प्रतिभाग किया। किसानों ने इस पहल को बेहद उपयोगी बताते हुए कहा कि सफल किसानों के अनुभवों से सीखना उनके लिए किसी विश्वविद्यालय से कम नहीं है। विशेष बात यह रही कि रिवर्स पलायन कर गांव लौटे और खेती से जुड़े एक स्टेट बैंक अधिकारी महेश चन्द्र खर्कवाल ने भी इस पहल को नए किसानों के लिए प्रेरणादायक और समय की जरूरत बताया।

Jaya punetha editor in chief ।

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