मानेश्वर समाचार।
31 अगस्त 2025
हजारों लोगों ने टकटकी निगाहों से गगनचुंभी झूमाधुरी मंदिर की चढ़ाई को पार करते देखा देवी रथों का विहंगम दृश्य।
निसंतानों की गोद भरने वाली मानी जाती है मां झूमादेवी। शनिवार की रात भर यहां हुआ देवी जागरण।
समाज सेवकों द्वारा लगाया गया यहां विशाल भंडारा।
लोहाघाट। मौसम की खराबी के बावजूद नगर के उत्तर दिशा की ओर 4 किमी दूर ऊंची पहाड़ी में स्थित मां झूमा धुरी मंदिर की ओर सभी लोगों का सुबह से ही रुख बना हुआ था। यहां चल रहे चार दिनी मां झूमाधुरी नंदाष्टमी महोत्सव के अंतिम दिन पाटन पाटनी एवं रायकोट महर गांव से मां भगवती व मां महाकाली की भव्य, दिव्य शोभा यात्राएं निकली। जिसमें हजारों लोग मां के नाम का जयकारा करते हुए चल रहे थे। दोनों गांव में कल रात भर देवडागर अवतरित हुए।पाटन पाटनी गांव के मंदिर से पहले भगवती की शोभायात्रा निकली, जिसमें भगवती के डांगर विनीत पाटनी, धन सिंह, दोनों लोग रथ में विराजमान हुए। इसी प्रकार रायकोट महर से निकली शोभा यात्रा में कालिका के रूप में राधिका देवी जबकि मां भगवती के रूप में दान सिंह महर रथ में विराजमान हुए। दोनों रथों की शोभायात्राओ ने मंदिर की तलहटी में स्थित विश्व देव मंदिर में कुछ समय के लिए विश्राम किया। जहां उन्हें दूध व चावल का भोग लगाया गया। पहले यहां भोग लगाते समय अदृश्य शक्तियां दिखाई देती थी, जिन्हें पुकारने पर वह गायब हो जाया करती थीं।
इस स्थान से देवी रथों को रस्सों से खींचकर ऊंची पहाड़ी में स्थित झूमाधुरी मंदिर की ओर ले जाया गया। दोनों रथों ने मंदिर की परिक्रमा की तथा रथ से उतरकर लोगों को अपना आशीर्वाद दिया। खड़ी चढ़ाई में रथों को खींच कर ला रहे सभी श्रद्धालु पसीने से पूरी तरह लतपत थे। दोनों रथों के मंदिर में पहुंचने के बाद पूरा प्रांगण लोगों से खचाखच भर गया। यहां शनिवार की रात से ही भजन कीर्तन का दौर जारी रहा तथा निसंतान महिलाएं हाथ में दीप लेकर मां से गोद भरने की प्रार्थना कर रही थी।
यहां पर पिछले डेढ़ दशक से झूमाधुरी नंदाष्टमी महोत्सव आयोजित होने के कारण मंदिर की तलहटी में भी अब मेला होने लगा है। मेले के मुख्य अतिथि आईटीबीपी के कमांडेंट संजय कुमार एवं उनकी धर्मपत्नी अनुराधा सिंह ने मेले के पुरातन स्वरूप को बनाए रखने के लिए सभी को बधाई दी कहा मेले हमारे पूर्वजों की ऐसी सांस्कृतिक विरासत है। जहां हम वर्ष में एक बार अपने साथियों से ईस्ट मित्रों से मिल पाते हैं। झूमाधुरी का मंदिर अत्यधिक ऊंचाई में होने के कारण यहां से हिमालय की नंदा देवी, त्रिशूल, पंचाचुली के अलावा हिमालय की लंबी पर्वत श्रृंखला तथा पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल एवं बद्रीनाथ की ऊंची पहाड़ियां का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। इसी स्थान के कुछ दूरी पर पहले मां के चरणों से गुप्त प्याला प्रवाहित होता था। जिसके स्थान पर अभी यहां नौला है। इस स्थान के दाहिनी और भी ऊंची चोटी में देवी की मूल शक्ति बताई जाती है। सुविधा की दृष्टि से पाटन के निसंतान राजमिस्त्री दंपति को इसी स्थान में मंदिर स्थापित करने के लिए स्वप्न में मां भगवती ने आदेश दिया था। यहां रात भर देवी जागरण हुआ। पाटन एवं लोहाघाट के एक दर्जन लोगों द्वारा यहां प्रतिवर्ष भंडारे का आयोजन किया जाता रहा है। मेले को देखने के लिए दूर दराज गांव से लोग आए हुए थे। आईटीबीपी की ओर से मेला परिसर में निशुल्क चिकित्सा शिविर लगाया गया। जिसका सैकड़ो लोगों ने लाभ उठाया। मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष मोहन पाटनी समेत अन्य लोगों द्वारा मुख्य अतिथि कमांडेंट संजय कुमार एवं उनकी धर्मपत्नी का भावपूर्ण स्वागत किया तथा उन्हें मेले के इतिहास की जानकारी दी। मेला कमेटी ने यहां चिकित्सा शिविर आयोजित करने के लिए भी कमांडेंट के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
मेले में पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त था। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने वन-वे ट्रैफिक की व्यवस्था की थी। जिसे देखते हुए मेला आयोजन समिति द्वारा इसे राज्य स्तरीय मेला घोषित करने की मांग की गई। मेले में मैदानी क्षेत्रों में भी काफी व्यापारी आए हुए थे, जिनके चेहरों की मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि उनका व्यापार अच्छा चला। थाना प्रभारी अशोक कुमार के अनुसार मेले पूरी तरह शांति पूर्वक निपटा तथा उन्होंने सहयोग के लिए सभी को धन्यवाद दिया।
विधायक की पहल से यहां हजारों लोगों की बुझती आ रही है पानी की प्यास।
लोहाघाट। क्षेत्रीय विधायक खुशाल सिंह अधिकारी द्वारा विगत वर्ष यहां मंदिर की तलहटी में कुआं खोदकर यहां के लिए पेयजल की व्यवस्था किए जाने के कारण हजारों लोगों की प्यास बुझती आ रही है। पूर्व में यहां पानी के संकट के चलते लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
फोटो_ पाटन पाटनी गांव से मंदिर की ओर जाते मां भगवती की डोलाशोभायात्रा। यहां हुए रात्रि जागरण में शामिल श्रद्धालु तथा आईटीबीपी द्वारा लगाया गया निःशुल्क चिकित्सा शिविर।
