80 वर्षीय कौशल्या मां की झुर्रियों में लौटी मुस्कान, जिलाधिकारी ने जनमिलन कार्यक्रम में उसे मिला सबसे बड़ा ‘मानवीय उपहार।

80 वर्षीय कौशल्या मां की झुर्रियों में लौटी मुस्कान, जिलाधिकारी ने जनमिलन कार्यक्रम में उसे मिला सबसे बड़ा ‘मानवीय उपहार।

वर्षों से आधार कार्ड न बनने पर वंचित थीं सभी सुविधाओं से, डीएम मनीष कुमार की तत्परता ने खोल दिया राहत का रास्ता।

चंपावत। बगेडीं गांव की 80 वर्षीय कौशल्या आमा के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार का जनमिलन कार्यक्रम किसी वरदान से कम नहीं साबित हुआ। वर्षों से आधार कार्ड न बनने के कारण सुविधाओं से वंचित चल रहीं आमा और उनका बेटा सोमवार को जिला अधिकारी द्वारा तत्काल समाधान मिलने से भावुक होकर लौटे। मंच पर ही आमा ने डीएम पर आशीर्वादों की बौछार कर दी। कौशल्या आमा के बायोमैट्रिक फिंगरप्रिंट न आने के कारण उनका आधार कार्ड नहीं बन पा रहा था। बेटा कई बार उन्हें 16 किलोमीटर दूर धौन तक कंधे पर ढोकर ले जाता, फिर वहां से वाहन से डीएम कार्यालय तक पहुँचना पड़ता था। हर बार मशीन फेल हो जाने से उसे मजदूरी भी छोड़नी पड़ती थी, लेकिन वर्षों से वह अपनी मां की सेवा के धर्म को निभाता आया।

आधार कार्ड न होने के कारण वृद्धावस्था पेंशन समेत सरकारी योजनाओं का एक भी लाभ उन्हें नहीं मिल रहा था। कंबल में लिपटी आमा की आंखें और कान भी साथ छोड़ रहे थे, और वे हर बार ईश्वर का नाम लेकर ही लौट जाती थीं।

जब यह पीड़ा जिलाधिकारी मनीष कुमार के संज्ञान में आई तो उन्होंने तुरंत संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। डीएम ने स्वयं आमा के हाथ देखकर ई-डिस्ट्रिक्ट मेनेजर को बुलाकर आधार कार्ड बनाने को कहा जिससे उन्होंने अपनी टिप्पणी भी लिख दी। जिससे आधार कार्ड की वैधता में किसी भी प्रकार की दिक्कतें न आ सके। बहरहाल आज आमा की चेहरे की खुशी देखने लायक थी।

Jaya punetha editor in chief ।

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