अब मांगलिक आयोजनों में गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’, रीता गहतोड़ी ने शुरू किया राष्ट्रप्रेम और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा अभियान ।
हाथों पर रंगोली से लिख रहीं ‘वंदे मातरम्’, जल बचाने और पेट्रोल-डीजल की फिजूलखर्ची रोकने का भी दे रहीं संदेश।
लोहाघाट। पहाड़ की सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रभक्ति से जोड़ने की एक अनूठी पहल इन दिनों लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। प्रमुख समाजसेविका रीता गहतोड़ी ने मांगलिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ के उद्घोष को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया है। वह प्रत्येक सुहागिन महिला, नवदंपति और परिवारों से आग्रह कर रही हैं कि जीवन के शुभ अवसरों पर ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष कर राष्ट्रप्रेम की भावना को और मजबूत बनाया जाए।
रीता गहतोड़ी मांगलिक कार्यक्रमों में अपने हाथों पर रंगोली से ‘वंदे मातरम्’ लिखकर लोगों को प्रेरित कर रही हैं। उनका कहना है कि आज जब देश अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब ‘राष्ट्र प्रथम, बाकी सब बाद में’ की भावना को जीवन में अपनाना समय की आवश्यकता है। उनका मानना है कि जिन अमर वीरों ने ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष करते हुए मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए, उनका स्मरण हर शुभ अवसर पर किया जाना चाहिए। इससे नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति और देश के प्रति समर्पण की भावना मजबूत होगी।
राष्ट्रप्रेम के साथ-साथ रीता गहतोड़ी पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं। वह लोगों से जल की प्रत्येक बूंद बचाने और डीजल-पेट्रोल की अनावश्यक खपत कम करने की अपील कर रही हैं। उनका कहना है कि बदलते पर्यावरणीय हालात को देखते हुए आज जल संरक्षण सबसे बड़ी जरूरत है। साथ ही छोटी दूरी के लिए साइकिल या पैदल चलने की आदत अपनाकर न केवल ईंधन की बचत की जा सकती है, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
रीता गहतोड़ी की इस अनूठी पहल को समाज के विभिन्न वर्गों से सराहना मिल रही है। लोग इसे राष्ट्रप्रेम, सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायी अभियान बता रहे हैं।
Jaya punetha editor in chief ।




