आज के समय में डॉ. पुनेठा जैसी सोच रखने वाले डॉ. ब्रिरले हैं।

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मानेश्वर समाचार।

1 जुलाई 2025

डॉक्टर्स डे पर विशेष _

 

लोहाघाट। जिले की ढाई लाख की आबादी का दिल थामे हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.केके पुनेठा ऐसे डॉ. है। जिन्हें धन से नहीं लोगो की सेवा कर उनकी दुवाएं बटोरने में अधिक आनंद आता है। उनके ताऊ हरिकृष्ण पुनेठा उस दौर के सरकारी अस्पताल में कंपाउंडर थे। उन्हें अपने लंबे अनुभव के कारण बच्चों के इलाज में महारत हासिल थी। अपने मेधावी भतीजे को चिकित्सा पेशे से जोड़कर उन्हें हृदय रोग विशेषज्ञ बनाने में उनके ताऊ की अहंम भूमिका रही। वे चाहते थे कि मेरा बेटा यही रहते हुए लोगो की सेवा करता रहे।

 

डॉ. पुनेठा को हृदय संबंधी रोगों का इतना ज्ञान है कि रोगी को वह जो दवा लिखते है, उसी दवा को दिल्ली के हार्ट स्पेशलिस्ट काफी जांच एवं हजारों रुपए की फीस लेकर लिखते है। डॉ. पुनेठा को लगातार दिल्ली, मुंबई के बड़े अस्पतालों से सेवा करने के मोटी रकम देने के लगातार ऑफर मिलते रहते हैं। लेकिन उन्होंने अपनो के ही बीच

रहते हुए सेवा करना उचित समझा।

यू कहिए डॉ. पुनेठा के कारण लोहाघाट की पहचान बनी हुई है। जहां कुमाऊं के विभिन्न स्थानों से रोगी डॉ. पुनेठा से परामर्श व उपचार कराने के लिए आते हैं।

 

फोटो _डॉ. के के पुनेठा।

 

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होमियोपैथ से हर रोग का इलाज करने में माहिर हैं डॉ. उर्मिला

 

लोहाघाट। उप जिला चिकित्सालय की होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. उर्मिला बिष्ट के आत्मीय व्यवहार का हर कोई कायल है। उन्होंने यहां होम्योपैथी चिकित्सा को इतना लोकप्रिय बना दिया है। कि लोगों को उपचार के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। अधिकतर महिला रोगी डा. उर्मिला को ही दिखाना चाहती हैं। होम्योपैथी चिकित्सा में मात्र दो रुपए की पर्ची में रोगी के हर मर्ज का इलाज हो जाता है। चिकित्सक के आत्मीय व्यवहार से रोगी को यकीन हो जाता है कि अब वह ठीक हो जाएगा।

डॉ उर्मिला हर रोग का उपचार करने में काफी माहिर हैं इनका अध्ययन इतना गहन है कि ये मन में सोचती है कि कैसे रोगी को रोगमुक्त कर सकू। इनके यहां इलाज कराने के लिए टनकपुर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, से भी रोगी यहां परामर्श के लिए आते है।

 

फोटो_डॉ. उर्मिला बिष्ट।

 

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डॉ. दुबे में समाया हुआ है देवत्व का रूप।

 

लोहाघाट। अद्वैत आश्रम मायावती के धर्मार्थ चिकित्सालय में पिछले 17 वर्षों से अपनी निशुल्क सेवा दे रहे पांडिचेरी के प्रसिद्ध निश्चेतक डॉ. डी एस दुबे यहां के लोगों के लिए भगवान से कम नहीं है। डॉ दुबे के कारण यहां आने वाले सर्जनों को कई रोगियों का सर्जिकल ऑपरेशन करने में काफी मदद मिलती रही है। डॉ. दुबे का कहना है कि चिकित्सा पेशे में धन की कोई कमी नहीं होती है लेकिन मायावती में सेवा करते हुए जो आनंद मिलता है उसे रूपए पैसे से नहीं खरीदा जा सकता है।

अस्पताल के प्रबंधक स्वामी एकदेवानंद जी महाराज का कहना है कि डॉ. दुबे मानव नहीं महामानव हैं, जिन्हें भगवान ने ही यहां भेजा है।

 

फोटो_डॉ. डी एस दुबे

Jaya punetha editor in chief ।