चंपावत का नंधौर अभ्यारण्य : प्रकृति, रोमांच और संरक्षण का अद्भुत संगम*।

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चंपावत 04 अक्टूबर 2025

*चंपावत का नंधौर अभ्यारण्य : प्रकृति, रोमांच और संरक्षण का अद्भुत संगम*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म को नई दिशा दी है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने नंधौर जैसे अभयारण्यों को न केवल राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।

उत्तराखण्ड की प्राकृतिक धरोहरों में से एक, नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य चंपावत जिले के टनकपुर क्षेत्र में स्थित है। वर्ष 2012 में स्थापित यह अभयारण्य लगभग 269 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और तराई आर्क लैंडस्केप का अभिन्न हिस्सा है। नंधौर नदी के किनारे बसे हरे-भरे सागौन के जंगल, समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों की बहुलता इसे न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनाते हैं, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं।

यहां बाघ, हाथी, तेंदुआ, स्लॉथ बियर सहित 31 से अधिक स्तनधारी प्रजातियां, 235 से अधिक पक्षी प्रजातियां और 277 पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसे प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव शोधकर्ताओं के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला बना देती हैं। जैव विविधता की यह समृद्ध धरोहर इसे उत्तराखण्ड का एक इको-टूरिज्म हब बनाने की क्षमता रखती है।

वर्ष 2015 से पर्यटन के लिए खोले गए नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य में आने वाले पर्यटकों को जंगल सफारी, नेचर वॉक और बर्ड वॉचिंग जैसी गतिविधियों का रोमांचक अनुभव मिलता है। यहां का शांत वातावरण, पगडंडियों से गुजरती हवाएं, पक्षियों का मधुर कलरव और वन्यजीवों की झलक पर्यटकों को अविस्मरणीय स्मृतियां प्रदान करती हैं।

साथ ही, यह अभयारण्य स्थानीय समुदायों की आजीविका संवर्द्धन का भी महत्वपूर्ण साधन है। इको-टूरिज्म से जुड़े रोजगार अवसरों ने ग्रामीणों को स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में नए रास्ते खोले हैं।

चंपावत जिला प्रशासन सभी प्रकृति प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों से अपील करता है कि वे नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य की सैर करें, इसके प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव लें और इस अनमोल धरोहर की रक्षा में सहभागी बनें।

Jaya punetha editor in chief ।