चम्पावत 16 जनवरी 2026
*ब्यूटी पार्लर से हर माह ₹6–7 हजार की आय, बबीता पांडे बनीं आत्मनिर्भर*
*स्थानीय उद्यम से आत्मनिर्भरता की ओर, ब्यूटी पार्लर बना आजीविका का सशक्त माध्यम*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अब दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुँच रहा है। इन योजनाओं से न केवल रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की नई दिशा भी मिल रही है।
जनपद चम्पावत के टनकपुर स्थित ग्राम नायगोठ की श्रीमती बबीता पांडे ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर न केवल स्वयं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि गाँव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभरी हैं।
बबीता पांडे एनआरएलएम (NRLM) के अंतर्गत गठित दिव्य शक्ति स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं तथा ग्रामोत्थान परियोजना से अनुबंधित ओम महिला विकास संकुल संघ से जुड़ी हुई हैं। उन्हें ग्रामोत्थान परियोजना के माध्यम से स्वरोजगार स्थापित करने का मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हुआ। यह परियोजना आईफैड (IFAD) एवं भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों की आजीविका में वृद्धि, पलायन पर रोक और आर्थिक सुदृढ़ीकरण है।
ग्रामोत्थान परियोजना के तहत बबीता पांडे को उद्यम स्थापना योजना की जानकारी दी गई, जिसके अंतर्गत ब्यूटी पार्लर स्थापित करने हेतु उन्हें कुल ₹1,00,000 की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई। इसमें ₹30,000 परियोजना अनुदान, ₹50,000 बैंक ऋण (परियोजना सहयोग से) तथा ₹20,000 लाभार्थी अंशदान शामिल था।
इस सहायता से उन्होंने ग्राम नायगोठ, टनकपुर में अपना ब्यूटी पार्लर स्थापित किया। बबीता ने विधिवत ब्यूटी कोर्स किया और मेकअप, हेयर स्टाइलिंग, स्किन केयर ट्रीटमेंट जैसी सेवाएँ प्रदान करना प्रारंभ किया। धीरे-धीरे उनके कार्य की गुणवत्ता और व्यवहार से प्रभावित होकर आसपास के क्षेत्रों से भी ग्राहक आने लगे।
शुरुआती दौर में उन्हें कुछ संकोच और चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने निरंतर मेहनत और समर्पण से अपने कार्य में सुधार किया। आज वे प्रतिमाह लगभग ₹6,000 से ₹7,000 की आय अर्जित कर रही हैं और उनका व्यवसाय निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है।
श्रीमती बबीता पांडे ने अपने ब्यूटी पार्लर को केवल एक व्यवसाय के रूप में नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण के मंच के रूप में स्थापित किया है। उनका प्रयास आज गाँव की अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रहा है।




