गौ-पालन से गृह-उद्योग तक का शानदार सफर: डंडाबिष्ट की महिलाओं ने स्वरोजगार से लिखी आत्मनिर्भरता की नई इबारत।

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चंपावत 30 अप्रैल 2026

*गौ-पालन से गृह-उद्योग तक का शानदार सफर: डंडाबिष्ट की महिलाओं ने स्वरोजगार से लिखी आत्मनिर्भरता की नई इबारत*

उत्तराखंड की शांत वादियों के बीच ‘जय माँ पूर्णागिरि डंडाबिष्ट स्वयं सहायता समूह’ की लक्ष्मी जोशी और उनके साथ जुड़ी 9 महिलाओं ने मेहनत और अटूट संकल्प से सफलता की एक नई इबारत लिखी है। साल 2018 में एक छोटे से विचार के साथ शुरू हुआ यह सफर आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए स्वावलंबन का एक उदाहरण बन चुका है। इन महिलाओं ने केवल सपने ही नहीं देखे, बल्कि अपनी संगठित शक्ति के बल पर उन्हें हकीकत में बदल कर दिखाया है।

समूह की आय का मुख्य आधार गो-पालन है, जिसके तहत वर्तमान में चार गायों की देखभाल की जा रही है। इन महिलाओं के अथक परिश्रम का ही परिणाम है कि समूह प्रतिदिन 12 लीटर दूध का उत्पादन कर बाजार में आपूर्ति कर रहा है। डेयरी व्यवसाय के इस ठोस आधार ने न केवल समूह को आर्थिक स्थिरता दी है, बल्कि पशुपालन की दिशा में एक आधुनिक दृष्टिकोण भी पेश किया है। पशुपालन के साथ-साथ इन महिलाओं ने टिफिन सर्विस के क्षेत्र में भी अपने हाथ आजमाए हैं, जो वर्तमान में काफी सफल साबित हो रही है। इस सेवा के माध्यम से समूह की कई महिलाओं को घर के पास ही सम्मानजनक रोजगार मिल रहा है, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आया है।

सिर्फ दूध और टिफिन सर्विस तक ही इनका सफर सीमित नहीं रहा, बल्कि इन कर्मठ महिलाओं ने अपनी उपजाऊ भूमि का सदुपयोग करते हुए सब्जी उत्पादन में भी महारत हासिल की है। खेतों से निकलने वाली ताजी सब्जियां उनके उद्यम को और अधिक विविधता प्रदान करती हैं। विशेष रूप से त्योहारी सीजन के दौरान इस समूह की रचनात्मकता और कौशल और भी निखर कर सामने आता है। उस समय ये महिलाएं आंवला कैंडी, अदरक कैंडी और चुकंदर व आंवले के मिश्रण से प्राकृतिक ‘माउथ फ्रेशनर’ जैसे उत्पाद तैयार करती हैं, जिनकी बाजार में काफी मांग रहती है। लक्ष्मी जोशी के नेतृत्व में चल रहा यह समूह आज इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और साथ मिलकर काम करने का जज्बा हो, तो ग्रामीण परिवेश में भी उद्यमिता के नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं।

Jaya punetha editor in chief ।