वर्षाकाल में राजमार्ग बंद होने पर जिलाधिकारी द्वारा स्वयं मॉनिटरिंग करने से आम लोगों को मिल रही है बड़ी राहत।

मानेश्वर समाचार।

17 अगस्त 2025

वर्षाकाल में राजमार्ग बंद होने पर जिलाधिकारी द्वारा स्वयं मॉनिटरिंग करने से आम लोगों को मिल रही है बड़ी राहत।

गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष भारी वर्षा होने के बावजूद भी ऐसी नौबत नहीं आई जब राजमार्ग 24 घंटे बंद रहा हो।

चंपावत : मॉडल जिले की ऐसे नई कार्य संस्कृति माने या हर क्षेत्र में “फास्ट स्पीड” एवं “क्विक डिसीजन” लेने वाले जिला अधिकारी मनीष कुमार की “धमक” का असर है, यहां के हर क्षेत्र में जमीन पर दिखाई दे रहा है। चंपावत जिले की लाइफ लाइन कहे जाने वाला टनकपुर-पिथौरागढ़ राजमार्ग बरसाती मौसम में कब वाहनों की रफ्तार रोक ले, इसकी शंका व आशंका यात्री एवं चालकों को अपनी यात्रा शुरू करने से पहले हो जाया करते थी। लेकिन उनका नजरिया व भरोसा अब बदल गया है। बारिश हो रही है तो भी सड़क देर सवेर खुल ही जाएगी, उनमें यह भरोसा पैदा किया है जिलाधिकारी मनीष कुमार ने, जो स्वाला का डेंजर जोन हो या संतोला में सड़क बंद होने की सूचना मिलते ही दिन हो या रात पहुंच जाते हैं। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग कर्मियों की सतर्कता इतनी बढ़ गई है कि वे रात भर शिफ्ट में बुलडोजर के साथ काम करने में लगे हुए हैं। इसका नतीजा यह रहा कि इस वर्ष अभी तक यह नौबत नहीं आई कि राजमार्ग 24 घंटे तक बंद रहा हो। रक्षाबंधन के दिन डेंजर जोन में फंसे यात्रियों को भले ही कुछ घंटों तक रुकना अवश्य पड़ा हो लेकिन उन्हें यह देखकर संतोष करना पड़ा कि सड़क को खोलने के लिए डीएम स्वयं युद्ध स्तर पर स्पॉट में मोर्चा संभाले हुए हैं। इसका परिणाम यह निकला कि यात्री त्यौहार के दिन देर-सवेर अपने घरों तक पहुंच गए। यह भी पहली बार देखा गया कि वहां सभी अधिकारियों के वाहनों को यात्रियों के अदला बदली करने में लग दिया गया। राजमार्ग के अधिशासी अभियंता डीएस जरमाल को अपनी टीम के साथ उस खतरना भौगोलिक स्थित में ही रात बितानी पड़ी जहां कभी भी अनहोनी हो सकती थी। इस वर्ष डेंजर जोन के पास स्वतंत्रता दिवस के तीन रोज पहले ऐसे स्थान में चट्टान दरक गई जो जहां की पहाड़ी पेड़ों की हरियाली से बंधी हुई थी। इस स्थान में बहुत बड़ी अनहोनी टल गई। इस वर्ष गत वर्ष की तुलना में औसत से कहीं अधिक वर्षा होने के बावजूद गत वर्ष जहां डेंजर जोन में हफ्ते से अधिक समय तक सड़क बंद होने से लोगों को रुला दिया था। इस दफा अभी तक यह नौबत ही नहीं आई है ।

Jaya punetha editor in chief ।

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