मानेश्वर समाचार।
17 अगस्त 2025
पलायन कर चुके लोगों को आइना दिखा रहे हैं शक्तिपुर के जगदीश।
अच्छी खासी नौकरी छोड़कर खेत से सोना पैदा कर स्वाभिमान से जीने का दे रहे यह संदेश।
चंपावत। पुलिस लाइन के आगे बढ़ते ही सेव की विभिन्न प्रजातियों की खुशबू खेत से जुड़कर अपनी तकदीर बदलने में लगे जगदीश पाण्डेय के बगीचे की ओर हर व्यक्ति को खींच ले जाती है, जहां जाने वाला व्यक्ति उनके पुरुषार्थ से प्रेरणा लेकर कुछ ऐसा ही करने का मूड बनाकर लौटता है। जगदीश ने रिलाइंस की नौकरी छोड़कर खेत को अपनी आजीविका एवं सम्मान से जीने का अवसर बनाया है। कोरोना काल उनके लिए स्वर्णिम अवसर लेकर आया। इससे पूर्व इन्होंने अपनी पच्चपन नाली भूमि में से 28 नाली भूमि आबाद कर उसमें सब प्रकार के सेव के पौध, हर प्रकार की सब्जियां पैदा करना शुरू कर दिया। बाद में इन्होंने सेव की एम-9, एम-111, सिडलिंग, गाला, रेडलम गाला, रेड डेलीसस आदि प्रजातियों के सेव लगाए। इसके बाद इन्होंने लोहाघाट के पाटन गांव में मुरलीधर पाण्डेय के बगीचे को देखकर इनका उत्साह बढ़ गया, और इन्होंने अपने यहां 1300 सेब के पेड़ लगा दिए। जो पहली फलत देने लगे हैं। जगदीश सब्जियों का भी उत्पादन करते हैं।इनके यहां सभी उत्पाद जैविक मिलते हैं। बाजार में उनके नाम से सब्जियां बिकती है। जैविक खाद के लिए इन्होंने आठ गायें भी पाली हैं।इनसे प्रतिदिन 40 लीटर दूध पैदा करते हैं। इनके उत्पादों की खपत पुलिस लाइन से ही शुरू हो जाती है। इस कार्य में इनकी पत्नी लक्ष्मी इनका परछाई की तरह साथ देती हैं।लगभग छह लाख तक वार्षिक आमदनी करने वाले जगदीश ने अपने लिए अलग से पेयजल लाइन बनाई है। इसी से वह सिंचाई भी करते हैं, लेकिन गर्मियों में स्त्रोत का पानी सूखने से यह वाहनों के जरिए पानी ढोकर अपने बगीचे को जिंदा रखते आ रहे है। जिसमें इनका अधिकांश पैसा निकल जाता है। जगदीश का कहना है यदि उनके यहां सौर ऊर्जा पर आधारित सिंचाई सुविधा मिल जाए तो इनका कारोबार डेढ़ गुना अधिक बढ़ जाएगा। उद्यान विभाग की एडीओ निधि जोशी एवं केबीके की उद्यान वैज्ञानिक डॉक्टर रजनी पंत इन्हें हर वक्त प्रोत्साहित करती रहती हैं।पलायन करने वालों की तो आंखें ही खोल रहे हैं, जगदीश- जिलाधिकारी चंपावत। आखिर किसान के बेटे जिलाधिकारी मनीष कुमार ने जगदीश के बगीचे में जाकर उनके पुरुषार्थ को समझा तथा उनकी पीठ थपथपाई। दिन ढलने के बाद आए जिलाधिकारी ने जगदीश की गौशाला समेत सभी कार्य देखते हुए उन्हें उनके साथ किसानी के अनुभव भी साझा किए, कहां जगदीश पलायन रोकने वालों की आंखें खोल रहे हैं। इन्हें हर स्तर पर प्रोत्साहित किया जायेगा।
Jaya punetha editor in chief ।



