चम्पावत 25 जून 202
*चम्पावत में आगामी मानसून के मद्देनजर मा मुख्यमंत्री जी के निर्देशों पर आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज, नदियों के तटबंधों और संवेदनशील सड़कों पर विशेष फोकस*
आगामी मानसून और संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए चम्पावत जिला प्रशासन तैयार है।
जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के आपसी तालमेल को मजबूत करने के लिए अब तक छह महत्वपूर्ण बैठकें की जा चुकी हैं। प्रशासन हर ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में सामने आने वाली जनसमस्याओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित आपदा संबंधी संवेदनशील मुद्दों की निरंतर समीक्षा कर रहा है।
आपदा से बचाव की इस कड़ी में टनकपुर और बनबसा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में जन-सहभागिता तथा अंतर-विभागीय समन्वय से ‘रिवर ट्रेनिंग’ (नदी का रुख मोड़ने और सुधार) का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। सिंचाई विभाग द्वारा शारदा नदी के चार प्रमुख तटबंधों पर युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही खेतखेड़ा, थ्वालखेड़ा, ब्रेथवाइट कंपनी क्षेत्र और शारदा कॉरिडोर में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि उनके द्वारा स्वयं भी आमबाग, भजनपुर और देवीपुरा जैसे आंतरिक इलाकों का स्थलीय निरीक्षण कर स्थानीय नालों और बनबसा व टनकपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग के जलभराव वाले नालों की सफाई के सख्त निर्देश दिए हैं।
जिले की सभी पांचों नगर पालिकाओं के अधिशासी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कल्वर्ट्स (पुलियों) को खोलने और ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह साफ रखने के लिए निर्देशित किया गया है।
सड़क बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, एनएच, पीएमजीएसवाई, जिला पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग को सड़कों के किनारे झाड़ियों की कटान करने, चेतावनी बोर्ड लगाने तथा कल्वर्ट्स को दुरुस्त रखने को कहा गया है।
निर्माणदायी संस्थाओं को मानसून से पहले सड़कों से सभी निर्माण सामग्री हटाने की सख्त हिदायत दी गई है ताकि यातायात बाधित न हो। लंबे समय से चुनौती बने ‘स्वाला डेंजर ज़ोन’ में घाटी की तरफ शत-प्रतिशत और पहाड़ी की तरफ 95 प्रतिशत सुरक्षा कार्य पूरा हो चुका है, जिसे 30 जून तक हर हाल में पूर्ण कर लिया जाएगा। यहाँ 100 मीटर की सड़क को डबल लेन सीसी मैटेलिक रोड में बदला जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चिन्हित 22 कल्वर्ट्स में से चम्पावत क्षेत्र के कार्य पूरे हो चुके हैं और लोहाघाट में काम अंतिम चरण में है।
बेलखेत में मंदिर के पास का हिस्सा सुरक्षित करने के साथ ही अमौड़ी में रिवर ट्रेनिंग, रीठा साहिब में क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और एनएच के संवेदनशील क्षेत्र ‘संतोला’ पर सुधारात्मक कार्य किए जा चुके हैं।
आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के तहत सभी संवेदनशील इलाकों में रात के समय पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और आपदा उपकरणों को ठीक रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी आपात स्थिति के लिए क्विक रिस्पांस टीमों (QRT) का गठन हो चुका है। मानसून में सर्पदंश (स्नेक बाइट) की घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को सभी केंद्रों पर आवश्यक दवाओं के साथ पर्याप्त एंटी-वेनम उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। सुदूरवर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा आवश्यक राशन व रसद सामग्री का अग्रिम भंडारण किया जा रहा है ताकि स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।
हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हेलीपैड्स का निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है, जिन्हें 30 जून तक चालू करने का लक्ष्य है। साथ ही 1 जुलाई से कुमाऊं मंडल के लिए पिथौरागढ़ में विशेष हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध हो जाएगी। एक बेहद मानवीय और संवेदनशील पहल के अंतर्गत, मानसून के दौरान जिन गर्भवती व धात्री महिलाओं का प्रसव का समय संभावित है, उन्हें सड़क बंद होने जैसी स्थिति से बचाने के लिए जिला मुख्यालयों और बड़े अस्पतालों के पास किराए के परिसरों में समय से पहले सुरक्षित शिफ्ट करने की व्यवस्था की जा रही है।
सभी विभागों को ‘इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम’ (IRS) के तहत उनकी भूमिकाओं से अवगत करा दिया गया है और फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी हैं। अब कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति के जिला मुख्यालय नहीं छोड़ सकेगा।




