जिलाधिकारी ने ली स्प्रिंग एवं रिवर पुनरुद्धार प्राधिकरण (सारा) की समीक्षा बैठक, दिए आवश्यक दिशा निर्देश।

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चम्पावत, 25 जून 2026

*जिलाधिकारी ने ली स्प्रिंग एवं रिवर पुनरुद्धार प्राधिकरण (सारा) की समीक्षा बैठक, दिए आवश्यक दिशा निर्देश*

*जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर जोर, सारा परियोजनाओं की प्रगति की जिलाधिकारी ने की समीक्षा*

जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला सभागार में स्प्रिंग एवं रिवर पुनरुद्धार प्राधिकरण (सारा) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में संचालित विभिन्न जल संरक्षण एवं स्रोत पुनर्जीवन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने चम्पावत को जल संरक्षण का मॉडल जनपद बनाने की दिशा में कार्य करने पर बल देते हुए सभी नौलों एवं धारों की मैपिंग कर उनके संरक्षण एवं पुनर्जीवन हेतु ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने सारा, वन एवं मत्स्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर जल संरक्षण गतिविधियों को गति देने तथा धारा-नौला संरक्षण समितियों के गठन पर भी जोर दिया।

बैठक में डिप्टेश्वर, गौड़ी नदी तथा कालसन-भोलेश्वर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने डिप्टेश्वर क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए छोटे-छोटे चेकडैमों की कार्ययोजना तैयार करने तथा कालसन-भोलेश्वर एवं गौड़ी नदी परियोजनाओं के अंतर्गत चौकुनीबोरा, राकड़ीफूलारा, मुड़ियानी और खर्ककार्की क्षेत्रों में संचालित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

‘एक जनपद-एक नदी’ योजना के तहत चयनित गौड़ी नदी परियोजना की जानकारी देते हुए अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई श्री विमल कुमार सूंठा ने बताया कि परियोजना की प्रथम चरण की डीपीआर को राज्य स्तर से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है तथा कार्यों के क्रियान्वयन के लिए 103.02 लाख रुपये की धनराशि भी आवंटित की जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि कालसन-भोलेश्वर परियोजना के अंतर्गत जल संरक्षण एवं भूजल संवर्धन के उद्देश्य से 22 परकोलेशन टैंक निर्मित किए गए हैं। साथ ही जल प्रवाह को नियंत्रित कर नमी संरक्षण हेतु लगभग 34 हजार रनिंग मीटर लंबाई की 12 हजार कंटूर ट्रेंचों का निर्माण कार्य किया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने वर्षा आधारित नदी उपचार गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा चिन्हित जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास एवं निर्माण कार्यों के दौरान किसी भी पारंपरिक नौले, धारे अथवा घराट को क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए। साथ ही पूर्व में क्षतिग्रस्त जल स्रोतों का चिन्हीकरण कर उनके पुनर्जीवन हेतु भी आवश्यक कदम उठाने को कहा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विमल कुमार सूंठा, उप प्रभागीय वनाधिकारी नेहा सौन, खंड विकास अधिकारी अवनीश कुमार उपाध्याय, खंड विकास अधिकारी मोनिका पाल, मत्स्य विभाग से त्रिभुवन मौर्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

Jaya punetha editor in chief ।