जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन पर जिलाधिकारी का फोकस, ‘सारा’ परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।

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चंपावत 29 मई, 2026

*जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन पर जिलाधिकारी का फोकस, ‘सारा’ परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की*

जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला सभागार में स्प्रिंग एवं रिवर पुनरुद्धार प्राधिकरण (सारा) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जनपद में संचालित विभिन्न सारा परियोजनाओं, प्राकृतिक धारे-नौलों के संरक्षण तथा जल स्रोतों के पुनर्जीवन कार्यों की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। जिलाधिकारी ने डिप्टेश्वर, गौड़ी तथा कालसन भोलेश्वर जैसी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को सभी कार्यों को पूरी गति और समयबद्धता के साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कालसन भोलेश्वर परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत कुल धनराशि को लघु सिंचाई एवं वन विभाग द्वारा पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण ढंग से व्यय किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने डिप्टेश्वर क्षेत्र में छोटे-छोटे चेकडैमों के निर्माण के माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कालसन भोलेश्वर परियोजना एवं गौड़ी नदी संरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत चौकुनीबोरा, राकड़ीफूलारा, मुड़ियानी तथा खर्ककार्की क्षेत्रों में भी चल रहे कार्यों में तेज़ी लाने को कहा।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी द्वारा ‘एक जनपद-एक नदी’ योजना के तहत चयनित गौड़ी नदी परियोजना की भी विशेष समीक्षा की गई। इस संबंध में जानकारी देते हुए लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विमल कुमार सूंठा ने बताया कि लघु सिंचाई, ग्राम्य विकास (विकास खंड, चम्पावत) और वन विभाग के आपसी सहयोग से तैयार की गई प्रथम चरण की डी०पी०आर० (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) को राज्य स्तर से मंजूरी मिल चुकी है। इस परियोजना के कार्यों को धरातल पर शुरू करने के लिए वर्तमान में 103.02 लाख रुपये की वित्तीय धनराशि का आवंटन भी किया जा चुका है। इसके साथ ही चम्पावत विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली “कालसन भोलेश्वर” परियोजना की प्रगति साझा करते हुए अधिशासी अभियंता ने बताया कि शासन से स्वीकृत यह परियोजना वर्तमान में लघु सिंचाई खंड चम्पावत एवं चम्पावत वन प्रभाग के माध्यम से संचालित की जा रही है। इस क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पानी को रोकने और जमीन के भीतर भेजने हेतु 22 परकोलेशन टैंक बनाए गए हैं। साथ ही पहाड़ों की ढलान पर पानी के बहाव को कम करने और नमी बनाए रखने के लिए 12,000 कन्टूर ट्रेंच यानी लगभग 34,000 रनिंग मीटर संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जो क्षेत्र के जल स्तर को सुधारने में बेहद मददगार साबित होंगी।

जिलाधिकारी ने जनपद में वर्षा आधारित नदी उपचार गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए निर्देशित किया कि चिन्हित नौलों एवं धारों के पुनर्जीवन हेतु ठोस कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सभी कार्यदाई संस्थाओं को कड़े निर्देश दिए कि निर्माण कार्य के दौरान किसी भी पारंपरिक नौले, धारे या घराट को कोई नुकसान नहीं पहुँचना चाहिए। इसके अतिरिक्त उन्होंने विकास कार्यों के दौरान पहले से क्षतिग्रस्त हो चुके पारंपरिक जल स्रोतों का चिन्हीकरण कर उनके पुनर्जीवन की दिशा में प्रभावी कदम उठाने को कहा।

बैठक में अपर जिलाधिकारी कृष्ण नाथ गोस्वामी, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विमल कुमार सूठा, एसडीओ वन सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी मोहित मल्ली सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

Jaya punetha editor in chief ।