चंपावत 29 सितंबर 2025
*पौध किस्मों एवं बीज विविधता संरक्षण पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन*
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), लोहाघाट, चम्पावत में सोमवार को पौध किस्मों और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम (PPV&FR Act), 2001 के विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों, वैज्ञानिकों और अन्य हितधारकों को अधिनियम के प्रावधानों और बीज विविधता संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक करना था।
कार्यशाला का प्रारंभ पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इस दौरान, निर्देशक, प्रसार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
पारंपरिक ज्ञान और संरक्षण पर विशेषज्ञों के विचार
कार्यशाला में डॉ. विश्वजननी सत्यगिरी ने “भारतीय ज्ञान परम्परा संरक्षण एवं संवर्धन रूपरेखाएँ” विषय पर व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने भारतीय पारंपरिक कृषि प्रणाली में सदियों से कृषकों द्वारा किए जा रहे बीज संरक्षण और जैव विविधता के अनोखे उदाहरणों को रेखांकित किया। पर्यावरण कार्यकर्ता श्री विजय जरधारी ने “पारंपरिक बीजों का संरक्षण: समय की माँग” विषय पर विचार व्यक्त करते हुए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर पारंपरिक बीजों के संरक्षण का सुझाव दिया। डॉ. ए.जी.एच. जैदी ने “बौद्धिक संपदा अधिकार : मूल तत्व एवं संरक्षण” पर चर्चा की, जबकि श्री एन.पी. सिंह ने “परिवर्तन: कृषकों की उन्नति में” विषय पर अपने विचार साझा किए। इसके अतिरिक्त, डॉ. ए. के. शर्मा ने PPV&FR अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी देते हुए प्रतिभागियों को पंजीकरण प्रक्रिया का प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दिया।
कृषक अनुभवों का आदान-प्रदान
कार्यशाला में श्री नरेंद्र सिंह मेहरा और श्री राकेश उपाध्याय ने अपने कृषक अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने पारंपरिक फसलों को अपनाकर न केवल अपनी उपज बढ़ाई, बल्कि स्थानीय स्तर पर अन्य किसानों को भी इस दिशा में प्रेरित किया। इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में उत्तराखंड राज्य के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों से लगभग 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें कृषक, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता और राज्य के समस्त प्रभारी एवं विस्तार अधिकारी शामिल थे।
समापन एवं आभार ज्ञापन
समापन अवसर पर जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों से इस प्रकार की कार्यशालाओं में सक्रिय रूप से शामिल होकर इसका अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
आयोजित कार्यक्रम में प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया।
कार्यशाला की प्रभारी अधिकारी डॉ. दीपाली तिवारी ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों, विशेषज्ञों और आयोजन समिति का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम किसानों और कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
Jaya punetha editor in chief ।




