सीमांत क्षेत्र चम्पावत में धरातल पर उतर रही योजनाएं, युवा किसानों ने रेशम उत्पादन में रची सफलता की नई कहानी।

चम्पावत 21 जून, 2026

*सीमांत क्षेत्र चम्पावत में धरातल पर उतर रही योजनाएं, युवा किसानों ने रेशम उत्पादन में रची सफलता की नई कहानी*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और ‘विकल्प रहित संकल्प’ के विजन का असर अब उत्तराखंड के सुदूर और सीमांत क्षेत्रों में साफ नजर आने लगा है। राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के लिए संचालित की जा रही कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ सीमांत क्षेत्रों के काश्तकारों तक पहुंच रहा है।

इसी कड़ी में जनपद की त्यारसौ ग्रामसभा में दो स्थानीय युवाओं ने सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर बेहद कम समय में सफलता की एक नई कहानी लिखी है।

त्यारसौ ग्रामसभा के दो युवा किसानों, भीम कुमार और नीरज माहरा ने मेहनत, लगन और नवाचार के बल पर शहतूत आधारित रेशम कीटपालन के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है।

बाटुली एफपीओ (कृषक उत्पादक संगठन) से जुड़े इन दोनों युवाओं ने रेशम विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए शहतूत के पौधों का रोपण किया और राज्य सरकार की कल्याणकारी नीतियों का लाभ उठाते हुए मात्र 10 माह के भीतर रेशम कोकून का व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया। ट्रायल के रूप में शुरू किए गए इस अभिनव प्रयास में दोनों किसानों ने केवल 20 दिनों के भीतर लगभग 12 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता का कोकून तैयार कर लिया, जिसे रेशम विभाग द्वारा तुरंत खरीद भी लिया गया। उत्पाद की तत्काल बिक्री होने से सीमांत क्षेत्र के किसानों का उत्साह दोगुना हो गया है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, रेशम कीटपालन पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार का एक अत्यंत मजबूत और टिकाऊ माध्यम बनकर उभर रहा है। आने वाले समय में यह योजना न केवल किसानों की आजीविका में सुधार करेगी, बल्कि पहाड़ों से होने वाले पलायन को रोकने में भी गेम-चेंजर साबित होगी।

बाटुली एफपीओ के माध्यम से क्षेत्र के अन्य किसानों को भी शहतूत के पौधों के रोपण और रेशम कीटपालन के लिए तैयार किया जा रहा है, जिन्हें जल्द ही राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रशिक्षण देकर इस लाभदायक व्यवसाय से जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप रेशम विभाग सीमांत और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

सीमांत क्षेत्र त्यारसौ के इन युवाओं की यह बड़ी उपलब्धि इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि राज्य सरकार की नीतियां केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका वास्तविक लाभ सुदूर गांवों के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

Jaya punetha editor in chief ।

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