पलायन कर चुके पर्वतीय समाज को पूर्वजों की माटी से जोड़ने के लिए “ब्रांड एंबेसडर” बने हैं महेश खर्कवाल ।
देश का हर क्षेत्र देखने के बाद मुझे लगा है कि मेरे चंपावत जिले से कोई अच्छा जिला नहीं मिला मुझे – महेश
लोहाघाट। यहां के राजकीय पॉलिटेक्निक की स्थापना के पहले बैच में स्टेनोग्राफी एवं सेक्रेट्रियल प्रेक्टिस डिप्लोमा में यूपी में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्टेट बैंक में अधिकारी के रूप में सेवारत सुई गांव के महेश खर्कवाल आज पहाड़ के लोगों को उनके पूर्वजों की माटी से जोड़ने के अभियान का “ब्रांड एंबेसडर” बने हुए है । दरअसल बैंक सेवा की दृष्टि से 48 वर्ष पूर्व बरेली में अपना आशियाना बना चुके श्री खर्कवाल अधिकारी संगठन के ट्रेड यूनियन के शीर्ष पंक्ति के लीडर के रूप में उभरकर सामने आए । वहां उन्होंने पहाड़ के लोगों के लिए अलग
” कुर्मांचल नगर ” तक बसा दिया । पर्वतीय समाज को संगठित करने के लिए इनके द्वारा वहां उत्तरायणी, हरेला पर्व , बसंतोत्सव जैसे पर्वतीय पर्वों को सामूहिक रूप से मनाने की परंपरा शुरू की । यही नहीं इनके आवास से ही तब अलग उत्तराखंड राज्य की भावनाये स्फुटित होकर बरेली में रहने वाले लोग आंदोलन का हिस्सा बनने लगे । श्री खर्कवाल जहां भी गए वहां उन्होंने “उत्तराखंड महासभा” का गठन कर पहाड़ के लोगों को एक छाता के अंदर लाने का कार्य किया। ट्रेड यूनियन नेता की हैसियत से इन्हें देश के विभिन्न भू – भागों को देखने के बाद इन्हें लगा कि चंपावत जिले से सुंदर जगह कहीं नहीं है ।
अपनी सेवा पूरी करने के बाद इन्होंने “चलो अपने गांव की ओर” का नारा लगाते हुए स्वयं अपने लोहाघाट के समीप सुई गांव में आकर आधुनिक तकनिक से खेती बाड़ी करने लगे। गांव में अपने ईष्ट देवता का मंदिर बनाया तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से जन सेवा करने लगे है । श्री खर्कवाल के “चलो अपने गांव की ओर ” का आवाहन करने के बाद न केवल तीन दर्जन से अधिक लोग चंपावत जिले में अपनी माटी से जुड़ चुके हैं बल्कि कुमाऊं गढ़वाल के अन्य जिलों में भी इसका प्रभाव पड़ा है । श्री खर्कवाल का कहना है कि आज तक वे भीड़ का हिस्सा बने रहे । घर आकर शुद्ध आबो – हवा अपने खेत के जैविक फल सब्जी शुद्ध गाय का दूध शहद आदि मिल रहा है । इससे अच्छा और क्या हो सकता है! महेश ऐसे भाग्यशाली व्यक्ति हैं जिन्हें पार्वती जैसी महिला जीवनसाथी के रूप में मिली है। जो उनके हर कार्य में हाथ बटाती आ रही हैं। लगता है ईश्वर ने “महेश- पार्वती” की जोड़ी को यहां के सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यों के पुनर्जागरण एवं लोगों को अपने पूर्वजों की माटी का तिलक लगाने के अभियान के लिए ही भेजा है । श्री खर्कवाल समाज में व्याप्त नशे के प्रभाव से बेहद चिंतित है। उनका कहना है कि यहां के बच्चों को आज शासकीय सुविधाओ व प्रोत्साहन का लाभ उठाते हुए जीवन का ऊंचा मुकाम हासिल करने में अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए साथ ही लोगों को नशे के विरुद्ध बेहिचक आगे आना चाहिए क्योंकि यह जंगली आग की तरह फैल रही है यदि हमने इसमें लापरवाही की तो वह दिन दूर नहीं होगा जब आग की लपटे हमारे दरवाजे के पास आ जाएंगी ।
jaya punetha editor in chief ।




