चंपावत 16 जून 2026
*आदर्श चंपावत की सशक्त तस्वीर, स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं कुसुम सेठी*
*एक गाय से शुरू हुआ सफर अब बना आजीविका का मजबूत आधार, चंपावत की कुसुम बनीं महिलाओं के लिए मिसाल*
माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के ‘आदर्श चंपावत’ और महिला सशक्तिकरण की परिकल्पना को धरातल पर उतारते हुए जनपद की महिलाएं अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश कर रही हैं।
इन्हीं कर्मठ महिलाओं में से एक हैं चंपावत की कुसुम सेठी, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और सरकारी योजनाओं के सही समन्वय से खुद को एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित किया है। कुसुम सेठी की यह सफलता यात्रा क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन चुकी है।
कुसुम सेठी की इस आत्मनिर्भरता की राह वर्ष 2019 में तब आसान हुई, जब उन्होंने अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं को साथ मिलाकर ‘चांदनी स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया। वर्तमान में इस समूह में कुल 5 जागरूक महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। समूह से जुड़ने से पहले कुसुम जी के परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी और उनके पास आजीविका के रूप में केवल एक गाय थी, जिससे होने वाली आय सीमित थी। अपनी आजीविका को बढ़ाने और परिवार को एक मजबूत आर्थिक आधार देने के लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सीआईएफ (कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड) के तहत 50,000 रुपये की धनराशि का ऋण लिया। इस वित्तीय सहयोग से उन्होंने एक और उन्नत नस्ल की गाय खरीदी और अपने गौपालन के कार्य को एक नया विस्तार दिया।
आज कुसुम सेठी का यह गौपालन व्यवसाय पूरी तरह स्थापित हो चुका है।
वे आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन कर रही हैं और वर्तमान में उनके द्वारा हर दिन लगभग 9 लीटर दूध स्थानीय डेयरी में दिया जा रहा है, जिससे उन्हें नियमित रूप से एक निश्चित आय प्राप्त हो रही है। पशुपालन के साथ-साथ कुसुम जी ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय देते हुए कृषि और सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर हाथ आजमाया। पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उन्होंने इस सीजन में व्यावसायिक स्तर पर सब्जी उत्पादन किया, जिसके तहत उन्होंने 3 क्विंटल प्याज, 6 क्विंटल आलू और 3 क्विंटल गेहूं का सफल व्यापार कर बाजार में अपनी धाक जमाई है।
पहाड़ की समृद्ध कृषि परंपरा को जीवित रखते हुए और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कुसुम सेठी अपने खेतों में मोटे अनाज (मिलेट्स) और विभिन्न प्रकार की दालों का भी भरपूर उत्पादन कर रही हैं। विविधीकृत खेती और पशुपालन के इस बेहतरीन मॉडल की बदौलत आज कुसुम सेठी हर महीने 14 से 15,000 रुपये की आमदनी कर रही हैं। कभी सिर्फ एक गाय से घर चलाने वाली कुसुम जी आज अपने पूरे परिवार की रीढ़ बन चुकी हैं और उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और जिला प्रशासन के सहयोग से चांदनी स्वयं सहायता समूह की यह सफलता कहानी यह सिद्ध करती है कि यदि पहाड़ों में महिलाओं को सही अवसर और वित्तीय मदद मिले, तो वे ‘आदर्श चंपावत’ के संकल्प को सच करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
Jaya punetha editor in chief ।




