अधिकारी लोगों को टरकाने के बजाय उनका काम कर उन्हें संतुष्ट कर भेजने की आदत बनाएंगे, तो मेरे पास तक नहीं आएंगी छोटी-छोटी समस्याएं।

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अधिकारी लोगों को टरकाने के बजाय उनका काम कर उन्हें संतुष्ट कर भेजने की आदत बनाएंगे, तो मेरे पास तक नहीं आएंगी छोटी-छोटी समस्याएं।

मुझे जिले को मॉडल स्वरूप देने, रोजगार, लोगों के जीवन को सुगम बनाने एवं पलायन कर चुके लोगों को उनकी माटी से जोड़ने के लिए चाहिए समय – जिलाधिकारी

चंपावत। मुख्यमंत्री की परिकल्पना के अनुसार चंपावत को हिमालयी राज्यों का मॉडल जिला बनाने के प्रयासों में कुछ विभागों की सुस्त कार्य संस्कृति पर विभागीय अधिकारियों को आज जिलाधिकारी की तीखी प्रतिक्रिया से रूबरू होना पड़ा। उन्होंने आज पीएमजीएसवाई के एक सहायक अभियंता को प्रतिकूल प्रविष्टि देने, लोक निर्माण विभाग चंपावत के ईई का वेतन रोकने एवं पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को तब तक अवकाश न देने, जब तक कि वह सड़कों की हालत ठीक नहीं करते हैं। शासन द्वारा प्रत्येक कार्यदाई संस्था को 20-20 करोड रुपए आवंटित किए जा चुके हैं। इसके बावजूद भी हालातो में सुधार ना आना दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरे पास इतना समय नहीं है कि मैं लोगों की छोटी छोटी दिक्कतों को दूर करने में अपना समय लगाऊं। इस कार्य के लिए जो विभाग नियत हैं उन्हें लोगों को टरकाने के बजाय स्वयं उनकी समस्या निस्तारित करने की आदत बनानी चाहिए। यही नहीं यदि फरियादी का मामला यदि दूसरे विभाग में अटका है तो वहां भी समन्वय स्थापित कर उस व्यक्ति को संतुष्ट कर घर भेजें जो अपना धन व समय बर्बाद कर आपके पास आस लेकर आया है। अब ऐसी समस्या उनके पास आई तो संबंधित विभागीय अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई होगी। यह बात जिलाधिकारी मनीष कुमार ने जनता दरबार से निपटने के बाद अधिकारियों की बैठक में साफ तौर पर कहीं।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्यों की स्पीड फास्ट होनी चाहिए। साथ ही निमार्ण कार्यो में गुणवत्ता खराब होने एवं किसी प्रकार की अनियमिताएं होने पर निश्चित तौर पर प्रशासनिक एक्शन होगा। उन्होंने कहा सभी विभाग अपने कार्यालय के बाहर सेवा का अधिकार का बोर्ड लगाकर लोगों को जानकारी दें कि उनका विभाग जनता को क्या-क्या सुविधा दे रहा है। सीएम हेल्पलाइन के छः दर्जन मामले लटके हुए हैं। उन्हें निस्तारित करने की समय सीमा निर्धारित कि गई। वाइब्रेट गांव में जाकर लोगों से अधिकारी संवाद कर यह सुनिश्चित करें कि किस प्रकार वे गांव के विकास एवं रोजगार देने में मददगार बन सकते हैं। जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारी अपने विभाग की समस्याओं को स्वयं निपटाए, जहां जरूरी होगा वही पत्रावली उनके पास लाई जाए। लोगों की जरूरतों को समझने, उन्हें पूरा करने, उनके लिए रोजगार एवं उनके जीवन को सुगम बनाकर पलायन कर चुके लोगों को पुनः उन्हें अपने पूर्वजों की विरासत से जोड़ने के लिए मुझे समय चाहिए। जिसके लिए मैं लोगों के बीच जाकर उनकी आवश्यकताओं को समझ सकूं।

Jaya punetha editor in chief ।