हरेला पर्व आज हम सबके लिए धरती माता के प्रति कृतज्ञता अभिव्यक्त करने का है दिन ।

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मानेश्वर समाचार।

16 जुलाई 2025

हरेला पर्व आज हम सबके लिए धरती माता के प्रति कृतज्ञता अभिव्यक्त करने का है दिन।

 

हम सब मिलकर धरती माता के आवरण “वनों” को हर दृष्टि से बचाने एवं उसे हरा-भरा रखने का संकल्प लेते हैं।

 

मॉडल जिले में आज हम हरेला पर्व को यादगार बनाने के लिए एक पौध हमे संसार में लाने वाली “मां” दूसरा पौध धरती माता के कर्ज को कम करने के लिए लगाए।

 

 

“मां” तो एक ही होती है, उसके रूप अलग-अलग हैं। इस संसार में हमें लाने वाली “मां” है। एक है गौ माता, जो हर दृष्टि से हमारा पालन करती है। एक है तुलसी माता, जो हमारी सब प्रकार से रक्षा करती है। एक है गंगा माता, जो हमें पानी एवं हमारे खेतों को हरा-भरा करती आ रही है।

एक है “धरती माता”, जो अपने विराट रूप में हम सबको समाए हुए है और उसका श्रृंगार है वन, जिसका आंचल है- रंग-बिरंगे, हरे-भरे वन उपवन।

 

“मां” का सपूत कभी “मां” के आंचल को फाड़ने या उसे जलाने का प्रयास तो दूर उसके बारे में सोच भी नहीं सकता है।

 

जन चेतना ने इस दफा “धरती मां” का आंचल जलने से बचा दिया और वनों को न किसी प्रकार का नुकसान होने दिया।

 

इसके लिए हम सब की ओर से आपका वंदन एवं अभिनंदन है।

 

यही वजह है धरती माता का हमें आशीर्वाद मिल रहा है। सही समय से वर्षा, गर्मी और पेयजल के अभाव से पूरी तरह से राहत मिल रही है।

 

आइए! आज हम एक पौधा “मां” के नाम और एक पौधा “धरती माता” के नाम लगाकर उसके आंचल को हरा-भरा बनाए रखने का संकल्प भी लेते हैं।

 

माननीय मुख्यमंत्री जी की परिकल्पना के अनुसार मॉडल जिले के वनों को एक आदर्श रूप देने के लिए हम सब एक पौध “मां” के नाम तथा एक पौध “धरती मां” के नाम पर लगाकर इसके संरक्षण का संकल्प लेते हैं।

 

Jaya punetha editor in chief ।