चंपावत 02 जुलाई, 2026
*डिजिटल गवर्नेंस से सशक्त हुए अन्नदाता: चम्पावत में नई खाद नीति के तहत सुचारू हुई पारदर्शी खाद आपूर्ति, भ्रम की स्थिति हुई दूर*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत जनपद चम्पावत को पायलट डिस्ट्रिक्ट के रूप में चुना गया है।
इसके तहत जनपद में निर्बाध और पारदर्शी खाद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ऐप आधारित डिजिटल वितरण की एक नई व आधुनिक व्यवस्था शुरू की गई है, जिसे ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ का नाम दिया गया है।
नई खाद नीति के लागू होने के बाद शुरुआत में कृषकों के मध्य खाद की उपलब्धता और पात्रता को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, जिसे संबंधित विभागों द्वारा पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है।
मुख्य कृषि अधिकारी चम्पावत धनपत कुमार ने स्थिति साफ करते हुए जानकारी दी कि इस नई प्रणाली से अब कोई भी पात्र किसान घर बैठे ही ऐप के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार खाद की मांग दर्ज कर सकता है। मांग दर्ज होते ही ऐप द्वारा एक क्यूआर कोड जेनरेट होगा, जिसे सहकारी समितियों में दिखाकर किसान आसानी से बिना किसी रुकावट के खाद की आपूर्ति प्राप्त कर सकेंगे।
इस पारदर्शी व्यवस्था के तहत भूमिधारक किसानों के साथ-साथ दूसरों की जमीन पर खेती करने वाले या अस्पष्ट भूमि स्वामित्व वाले किसान भी खाद आपूर्ति का लाभ उठाने के लिए समान रूप से पात्र माने गए हैं, जिससे भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती है।
जनपद में खाद आपूर्ति को सुचारू, पारदर्शी और लचीला बनाने के लिए एआर सहकारिता प्रेम प्रकाश ने बताया कि सहकारी समितियों में पंजीकृत सदस्य किसान अपनी सुविधानुसार नगद अथवा उधार पर खाद ले सकते हैं, जबकि गैर-पंजीकृत किसानों को नगद भुगतान पर खाद की आपूर्ति की जाएगी। वृद्ध और असमर्थ किसानों की सहूलियत के लिए यह विशेष प्रावधान किया गया है कि यदि वे स्वयं समिति में आने में असमर्थ हैं, तो परिवार का कोई अन्य सदस्य अथवा कोई तृतीय व्यक्ति भी किसान का पहचान विवरण और खसरा नंबर ऐप में दर्ज कर क्यूआर कोड के जरिए खाद प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने बताया जनपद में सुव्यवस्थित खाद आपूर्ति के लिए पैमाना निर्धारित किया गया है, जिसके तहत प्रति एक हेक्टेयर जमीन पर 07 बोरी यूरिया और 04 बोरी डीएपी या एनपीके की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
प्रशासन द्वारा जनपद के समस्त किसानों को आश्वस्त किया गया है कि क्षेत्र में खाद आपूर्ति की कोई कमी नहीं है और फैलाई जा रही अफवाहों या भ्रम में आने की आवश्यकता नहीं है।
विशेषकर टनकपुर और बनबसा जैसे उच्च मांग वाले मैदानी क्षेत्रों में यूरिया और डीएपी का पर्याप्त स्टॉक पहले से मौजूद है और वहां मांग के अनुसार लगातार अतिरिक्त डीएपी की खेप भी पहुंचाई जा रही है। वहीं दूसरी ओर, चम्पावत और लोहाघाट जैसे पर्वतीय क्षेत्रों की समितियों में भी किसानों की आवश्यकता के अनुरूप यूरिया और डीएपी की उपलब्धता पूरी तरह सुनिश्चित की गई है। इस नई ऐप आधारित व्यवस्था के पूर्णतः प्रभावी होने से किसानों को खाद के लिए लंबी लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा, जिससे पूरी खाद आपूर्ति प्रक्रिया में अभूतपूर्व पारदर्शिता, गति और सुगमता आएगी।
Jaya punetha editor in chief ।




