घराट (पनचक्की) ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त माध्यम ही नहीं इससे जुड़ी हैं पूर्वजों की यादें।
घराट को नया जीवन देने के साथ इन्हें पर्यटन एवं मत्स्य पालन की दृष्टि से भी किया जाएगा पुनर्जिवित – जिलाधिकारी
चंपावत। पहाड़ों में पूर्वजों की विरासत घराट (पनचक्की) जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त माध्यम हुआ करती थी, इनके महत्त्व के समझने की भूल ने ग्रामीणों के मुंह से फलता-फूलता रोजगार छिन गया। इन्हीं घराटों के इर्द-गिर्द पहाड़ों की जिंदगी घुमा करती थी। लेकिन राज्य बनने के 25 साल बाद पहली बार जिलाधिकारी के रूप में मनीष कुमार ने घराटों के महत्व एवं इसमें निहित रोजगार को समझते हुए अब इसे बहुदेशीय बनाने की और कदम बढ़ाए हैं। पहाड़ों में घराट लोगों की सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन की धुरी रहे हैं। अपने पूर्वजों की विरासत को आज भी जिंदा रखते आ रहे देवीधुरा के समीप बैरख गांव के हयात मेहरा कहते हैं कि समय के साथ यदि घराटो के आधुनिकरण की सोच रखी गई होती तो आज हमारी यह विरासत लुप्त नहीं होती। उरेडा द्वारा आधुनिक तकनीक से बनाए गए घराट अनाज पिसने के साथ बिजली भी पैदा कर रहे हैं। हालांकि नदियों एवं गाड़ गधेरों का जलस्तर काफी कम हो गया है। इसके बावजूद भी श्री मेहरा का कहना है कि वह विषम परिस्थितियों में भी इस विरासत को जिंदा रखे हुए हैं। इसे देखने के लिए देवीधुरा आने वाले पर्यटक भी पहाड़ों के इस पुरातन उद्योग की कला को देखने के लिए आते हैं। जिलाधिकारी ने जिले के सभी घराटों को नया जीवन देने की पहल से हमारी भविष्य की उम्मीद में पंख लगे हैं।
जिले के सभी घराटों को दिया जाएगा नया जीवन – जिलाधिकारी
चंपावत। जिलाधिकारी मनीष कुमार का कहना है कि घराटों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर इन्हें पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जाएगा। घराट चलाने के लिए जहां पानी रोका जाता है उसमें मत्स्य पालन भी किया जा सकता है। गाड़ गधेरों व नदियों के जलस्तर को बढ़ाने के लिए इसके जलागम क्षेत्र में पानी के पोषक पौधों का सघन रोपण किया जाएगा ।
Jaya punetha editor in chief ।



