लोहाघाट के कृषि विज्ञान केंद्र को पंतनगर विश्वविद्यालय से हटकर सीधे आईसीएआर के अधीन लाने के लिए किस हुए मुकर।


मुख्यमंत्री की परिकल्पना के मॉडल जिले के नियोजन में शून्य सहयोग रहा है इस केंद्र का।
चंपावत। मॉडल जिले के एकमात्र कृषि विज्ञान केंद्र केवीके से यूं ही किसानों का मोह भंग नहीं हुआ है अब लोग इसे पंतनगर विश्वविद्यालय से हटकर सीधे आईसीएआर के अधीन देना चाहते हैं दरअसल 1984 में यहां किसानों की बेहतरीन के लिए 12 हेक्टेयर भूमि में पहले यहां पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय की ओर से कृषि अनुसंधान केंद्र खोला गया जिसे बाद में कृषि विज्ञान केंद्र नाम दिया गया केंद्र की स्थापना के बाद विश्वविद्यालय द्वारा यहां ऐसे प्रभारी भेजे गए जिनका किसानों के हित में नहीं बल्कि उन्हें समय काटने की छूट दी जाती रहे यह बात अलग है कि यहां सब्जी वैज्ञानिक के रूप में डॉक्टर एके सिंह के कार्यकाल में इस केंद्र में काफी प्रगति की तथा क्षेत्र में पहली बार होली हाउस खेती की शुरुआत की गई आज भी किस डॉक्टर सिंह के नाम की माला जपते आ रहे हैं हालांकि इस केवीके का कार्य क्षेत्र पूरा जिला है लेकिन इसकी गतिविधियां सीमित क्षेत्र तक ही जिले के किसानों को पता ही नहीं चलता है कि इस केंद्र की उपयोगिता क्या हैकेंद्र में होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी किसानों को दूसरे दिन अखबारों से मिलती है गुजरे 293 30 सितंबर को यहां विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर की मौजूदगी में बहुत किम एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम पर हुए राज्य स्तरीय सेमिनार में भी उन मुट्ठी भर किसानों को ही बुलाया गया था जो परंपरागत रूप से केंद्र के किसानों के हित में कार्य करने का अधिकारियों को प्रमाण पत्र बांटे आ रहे हैं 2 दिन का सेमिनार एक ही दिन में निपटा दिया गया
जानकारी शत्रु का कहना है कि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर कि इस केंद्र के प्रति एकाएक पैदा हुई रूचि केंद्र या किसानों के हित में काम अपना अपना अपनी सेवा का विस्तार करने पर अधिक बताई जाती है क्योंकि यह मुख्यमंत्री जी का निर्वाचन क्षेत्र है वैसे मुख्यमंत्री अपने पर कल्पना के अनुसार चंपावत को मॉडल जिला बनाने की योग की जो सोच रखते हैं उसमें कवि के का कोई योगदान नहीं रहा केंद्र के जरिए किसानों को मशरूम उत्पादन के लिए जिला योजना के तहत दी गई साढे 37 लख रुपए की धनराज से किसानों को प्रशिक्षण तो नहीं मिला किंतु इस धनराशि से क्या किया गया इसका जवाब किसी के पास नहीं है जी वैज्ञानिक डॉक्टर भूपेंद्र खाद्य के रुचि को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा मशरूम प्रशिक्षण हेतु यह धनराज दी गई थी इस वैज्ञानिक को साजिश के तहत यहां से हटा दिया गया प्रगतिशील किसान प्रदीप जोशी तुलसी प्रसाद एवं गंगाधर जोशी कहते हैं कि पंतनगर विश्वविद्यालय के अध्ययन रहते हुए यहां के कबक से जिले के किसानों का भला नहीं हो सकता इसके लिए यह आवश्यक हो गया है कि इस केंद्र को आईसीएआर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के सीधे अधीन किया जाए इसके लिए जिलाधिकारी को ज्ञापन भी दिया गया है ।




