चम्पावत 06 मई 2026
*दिव्यांगता बनी ताकत: ग्रामोत्थान परियोजना से आत्मनिर्भर बनीं जयमती देवी*
*हौसलों की जीत: ग्रामोत्थान परियोजना से सशक्त बनीं जयमती देवी*
जनपद चम्पावत स्थिति सुदूर ग्राम देवीपुरा की निवासी श्रीमती जयमती देवी आज आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरी हैं। कभी सीमित संसाधनों और शारीरिक चुनौतियों के कारण आजीविका के साधनों से दूर रहीं जयमती देवी का जीवन आज ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से नई दिशा पा चुका है।
श्री गोरख राम की पत्नी एवं माँ पूर्णागिरी स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य जयमती देवी के पास पहले आजीविका के नाम पर मात्र एक गाय थी, जिससे बहुत कम आय होती थी।
शारीरिक विकलांगता के चलते उनके लिए नियमित आय का कोई साधन विकसित करना कठिन था, जिससे वे पूरी तरह परिवार पर निर्भर थीं।
बावजूद इसके, आत्मनिर्भर बनने की उनकी इच्छा सदैव प्रबल रही। उनके जीवन में परिवर्तन तब आया जब आईफैड (IFAD) द्वारा वित्त पोषित एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित ग्रामोत्थान परियोजना गांव में लागू हुई।
इस परियोजना के अंतर्गत महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी आय में वृद्धि हेतु विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। स्वयं सहायता समूह की बैठक में ‘अल्ट्रापुअर योजना’ एवं ब्याजमुक्त ऋण की जानकारी मिलने पर समूह की महिलाओं ने जयमती देवी की परिस्थितियों को देखते हुए सर्वसम्मति से उनका चयन किया।
परियोजना टीम द्वारा सत्यापन उपरांत जयमती देवी को ₹35,000 की ब्याजमुक्त धनराशि उपलब्ध कराई गई। इस सहायता से उन्होंने एक अच्छी नस्ल की भैंस खरीदी और डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। आज वे प्रतिदिन लगभग 4 से 5 लीटर दूध का उत्पादन कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह ₹5,000 से ₹6,000 की नियमित आय प्राप्त हो रही है।
आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ जयमती देवी का आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान भी बढ़ा है। वे स्वयं कहती हैं कि ग्रामोत्थान परियोजना ने उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग दिया, बल्कि जीवन में एक नई पहचान और आत्मनिर्भर बनने का विश्वास भी प्रदान किया।




