गोवा गैस हादसे ने सरयू घाटी को दहला दिया: घाटी के नेत्र – सलान गांव के मनीष की मौत से मातम। 

गोवा गैस हादसे ने सरयू घाटी को दहला दिया: घाटी के नेत्र – सलान गांव के मनीष की मौत से मातम।

22 वर्षीय मनीष महर की दर्दनाक मौत से नेत्र – सलान गांव में पसरा मातम, विदेश जाने की तैयारी कर रहा था युवक सीएम और डीएम की त्वरित पहल से मृतक का पार्थिव शरीर एयरलिफ्ट होकर आज देर रात गांव पहुंचेगा।

लोहाघाट। गोवा के अरपुरा स्थित एक नाइट क्लब में रविवार को हुई गैस दुर्घटना में मरने वालों में लोहाघाट के नेत्र – सलान गांव का 22 वर्षीय मनीष महर भी शामिल था। इस मनहूस खबर ने पूरे सरयू घाटी को सदमे में डूबो दिया है। डेढ़ साल पहले बेहतर भविष्य की तलाश में गोवा गया मनीष उसी नाइट क्लब में बतौर कुक काम करता था।

कुछ दिन पहले ही वह घर आया था—पासपोर्ट बनवाने और विदेश जाने की उम्मीद लेकर। खुशमिजाज मनीष ने जाते वक्त माता-पिता से कहा था—

“पासपोर्ट बन गया है, अब गरीबी हमारा पीछा छोड़ देगी।”

लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। घोर गरीबी में जीवन काट रहे उसके पिता कृष्ण सिंह और मां मालती ने पहली बार भविष्य के उजाले महसूस किए थे—बड़े बेटे की नौकरी सुधरने जा रही थी, छोटा बेटा संजय पढ़ रहा था। मनीष के विदेश जाने की तैयारी परिवार के सपनों को पंख दे रही थी। पर रविवार को जब सरयू घाटी में हवा की तरह यह दुखद सूचना तैरने लगी, लोग यह तय नहीं कर पा रहे थे कि माता-पिता को यह दर्दनाक खबर दें भी या नहीं। पर अंततः यह खबर उनके कानों तक पहुंची, और दोनों बेसुध हो गए। गोवा से मिली पुष्टि, विजेंद्र सामंत ने दी सूचना

परिजनों को हादसे की आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पा रही थी। तभी गोवा में मनीष के बुआ के बेटे विजेंद्र सामंत घटना के बाद मौके पर पहुंचा। वहां मनीष का शव अधजली अवस्था में लावारिस पड़ा था। विजेंद्र ने तुरंत गांव वालों को सूचना दी। इसके बाद परिजन जिला पंचायत सदस्य योगेश जोशी के संपर्क में आए। श्री जोशी ने तत्काल जिलाधिकारी मनीष कुमार को सूचना दी।

जिला पंचायत सदस्य से घटना की जानकारी मिलने पर अवकाश पर गए जिलाधिकारी मनीष कुमार ने तुरंत कदम उठाए। पहले मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने गोवा के मुख्यमंत्री से बात कर सहयोग मांगा। इसके बाद गोवा प्रशासन सक्रिय हुआ। मामला इसलिए भी सरल हुआ क्योंकि गोवा के जिलाधिकारी अंकित यादव, चम्पावत डीएम के बैचमेट हैं। इसके बाद मनीष के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक एयरलिफ्ट कर दिल्ली भेजा गया, जहां से उसे सड़क मार्ग द्वारा गांव लाया जा रहा है। जो देर रात तक पहुंचेगा।

समाचार बॉक्स

गोवा हादसे में प्रशासन की मानवीय संवेदना बनी सहारा।

लोहाघाट — गोवा के नाइट क्लब गैस दुर्घटना में मृतक मनीष का पार्थिव शरीर घर तक लाना उसके परिवार के लिए बेहद कठिन था, मगर इस त्रासदी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी मनीष कुमार का मानवीय चेहरा सबसे बड़ा संबल बनकर सामने आया।

गोवा के दूसरे होटल में काम करने वाले बृजेंद्र सावंत के अनुसार, “यदि मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी मनीष कुमार मदद नहीं करते, तो मनीष का शव गांव तक पहुँचना लगभग असंभव था।” दुर्घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री धामी और डीएम मनीष कुमार ने परिवार से संवेदना जताते हुए हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। विशेष तौर पर जिलाधिकारी ने अपने छुट्टी पर घर जाने के बावजूद पूरी तत्परता से इस गरीब परिवार की सहायता की और शव को सुरक्षित गांव तक पहुँचाने की पूरी जिम्मेदारी निभाई। यह पहली बार नहीं है—जिलाधिकारी मनीष कुमार के कार्यकाल में जब-जब किसी जरूरतमंद पर संकट आया है, वे एक मजबूत सहायक बनकर सामने आए हैं। इस घटना में भी उन्होंने यह सिद्ध किया कि संवेदनशील प्रशासन ही जनता का वास्तविक संबल होता है। अवकाश के दौरान ही उन्होंने बागधारा में हुई दुर्घटना में राहत व बचाव कार्य का लखनऊ से ही संचालन किया।

Jaya punetha editor in chief ।

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