डायट लोहाघाट में ‘करो योग रहो निरोग’ कार्यशाला का दूसरा दिन, स्वस्थ समाज के निर्माण पर दिया जोर

डायट लोहाघाट में ‘करो योग रहो निरोग’ कार्यशाला का दूसरा दिन, स्वस्थ समाज के निर्माण पर दिया जोर

 

योग, आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय से स्वस्थ एवं खुशहाल समाज के निर्माण का संदेश

 

लोहाघाट (चंपावत)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) लोहाघाट में आयोजित जनपदीय कार्यशाला ‘करो योग रहो निरोग’ दूसरे दिन भी जारी रही। 23 अक्टूबर से संचालित इस कार्यशाला में जनपद के चारों विकासखंडों के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के 28 शिक्षक-शिक्षिकाएं प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यशाला में योग, प्राणायाम, आयुर्वेद और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।

 

कार्यशाला के जनपदीय समन्वयक डॉ. लक्ष्मीशंकर यादव ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को वर्तमान परिवेश और समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है। योग के माध्यम से ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, जो स्वस्थ, जागरूक और खुशहाल समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।

 

कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिदिन सुबह 8:30 से 9:30 बजे तक विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास कराया जा रहा है। इसमें आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोहाघाट की प्रशिक्षक सोनाली आर्य, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पऊ की शिक्षिका वंदना जोशी और पुष्करनाथ गोस्वामी प्रशिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

 

निरोगी समाज से ही विकसित भारत का सपना होगा साकार

 

सैद्धांतिक सत्र में आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. नमिता अग्रवाल ने कहा कि निरोगी समाज ही विकसित भारत के निर्माण का आधार है। उन्होंने विभिन्न रोगों, उनके लक्षणों और उपचार से संबंधित आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।

 

वहीं, आयुर्वेद के चिकित्सक एवं नोडल अधिकारी डॉ. सुधाकर गंगवार ने आयुर्वेद की आधुनिक चिकित्सा प्रणाली, उपचार की प्रभावशीलता तथा आमजन तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने पर बल दिया।

 

योग जीवन जीने की परिष्कृत पद्धति : पूजा भट्ट

 

बौद्धिक सत्र में पत्रकार पूजा भट्ट ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक परिष्कृत पद्धति है। यह व्यक्ति को बेहतर जीवनशैली अपनाने और जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने शिक्षकों से योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के साथ ही विद्यार्थियों को भी इसके प्रति जागरूक करने की अपील की।

 

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के प्राचार्य डॉ. आशुतोष वर्मा ने सभी वक्ताओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. ए.के. मिश्रा ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। कार्यशाला में डॉ. दीपक सोराड़ी, डॉ. मनोज भाकुनी, डॉ. कमल गहतोड़ी, डॉ. पारुल शर्मा और डॉ. लता आर्य सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

 

कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को योग एवं स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान से समृद्ध करने के साथ ही विद्यालयों में स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक वातावरण को बढ़ावा देने का संदेश दिया जा रहा है।

Jaya punetha editor in chief.

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