प्राथमिक विद्यालय मानाढुंगा ने कॉन्वेंट स्कूलों को मात देकर ग्रामीण क्षेत्रों में पैदा की शैक्षिक जागृति।
तीन शिक्षकों द्वारा अपने खर्चे पर स्वयंसेवी शिक्षिका की नियुक्ति कर यूकेजी में भी पढ़ा रहे हैं पांच बच्चों को।
लोहाघाट। सरकारी विद्यालयों की बदहाली के कारण जहां यह विद्यालय केवल उन छात्रों के लिए रह गए हैं जिनके अविभावक अपने बच्चों को बाहर पढ़ाने की स्थिति में नहीं है। पहाड़ों से पलायन का एक बड़ा कारण यह भी है। इसी सामाजिक परिवेश में प्राथमिक विद्यालय मानाढुंगा भी है। जहां के शिक्षकों के प्रयासों से उन्होंने उन कॉन्वेंट विद्यालयों को मात दे दी है, जो दो से तीन हजार रुपए प्रतिमाह फीस लेकर बच्चों का भविष्य तरास रहे हैं। इस विद्यालय की प्रधानाध्यापिका तारा अधिकारी यहां पढ़ने वाले बच्चों को मां की तरह न केवल अपना प्यार व दुलार देती आ रही है, बल्कि बच्चों के भविष्य को चमकीला बनाने के लिए वह सभी प्रयास करती है जो आवश्यक हुआ करते हैं। इस कार्य में उनका उनके सहयोगी शिक्षक बद्री सिंह भंडारी, रितु वर्मा परछाई की तरह उनके साथ देते आ रहे हैं। यही नहीं तीनों शिक्षकों ने विद्यालय में एक शिक्षक की कमी को पूरा करने के लिए अपने वेतन में से एक पढ़ी लिखी बालिका कंचन जोशी को पढ़ाने के लिए रखा हुआ है। अंग्रेजी मीडियम में संचालित इस विद्यालय के बच्चों का आत्म अनुशासन, आचार-विचार-संस्कार देखकर लोग कहते हैं कि यदि सभी शिक्षक इसी सोच के हो तो समाज की व्यवस्था बदल गई होती,बल्कि पलायन करने वालों का मूड भी बदल गया होता।
यहां बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार किया जाता है। प्रतिवर्ष नवोदय विद्यालय के लिए यहां के बच्चों का चयन होता है। इतना सब कुछ होने के बावजूद भी यह शिक्षक प्रचार प्रसार से बहुत दूर रहते हैं। उनका कहना है कि वह केवल उन अभिभावकों का विश्वास बनाए रखने के लिए अपने स्वयं के बच्चों की तरह भविष्य संवारने में लगे हुए हैं। इन शिक्षकों द्वारा विद्यालय में यूकेजी स्तर में भी पांच बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। जिनकी ड्रेस, कॉपी किताब और भोजन का खर्च ये तीनों शिक्षक उठाते आ रहे हैं, क्योंकि प्राथमिक विद्यालय में यूकेजी स्तर पर कोई नामांकन नहीं होता है। यहां प्रतिदिन बच्चों को योग भी कराया जाता है।
प्राथमिकता के आधार पर यहां शिक्षक की जाएगी तैनाती -सीईओ।
लोहाघाट। मुख्य शिक्षा अधिकारी मेहरबान सिंह बिष्ट का कहना है कि इस विद्यालय की चर्चा तो उन्होंने सुनी है लेकिन मैं वहां अभी तक जा नहीं पाया हूं। अलबत्ता इस विद्यालय में शिक्षक की कमी को वह प्राथमिकता के आधार पर दूर करेंगे।
Jaya punetha editor in chief ।




