चम्पावत 31 अक्टूबर 2025
*आपदा प्रभावित ग्रामीणों के लिए आवास स्वीकृत, जिलाधिकारी ने कहा—पारदर्शिता और गति से करें कार्य*
जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने जानकारी दी कि उत्तराखंड राज्य में दैवीय आपदा एवं अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों को राहत एवं पुनर्वास प्रदान करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (आवास प्लस) के अंतर्गत एक विशेष पैकेज (Special Package) स्वीकृत किया गया है। इस पैकेज के तहत राज्य को कुल 5,992 आवासों का लक्ष्य भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आवंटित किया गया है, जिससे आपदा प्रभावित ग्रामीण परिवारों का सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित होगा।
जिलाधिकारी ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इस विशेष परियोजना के क्रियान्वयन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के अनुसार पात्र लाभार्थियों की पहचान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के निर्धारित मानकों के अनुरूप की जाएगी। लाभार्थियों का चयन एवं विवरण ‘आवास 2024 मोबाइल ऐप’ के माध्यम से अपलोड किया जाएगा तथा केवल उन्हीं लाभार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी जिनके नाम अंतिम स्वीकृत ‘आवास सूची’ में सम्मिलित हैं।
उन्होंने कहा कि सभी आवासों का निर्माण पीएमएवाई-जी के कार्यान्वयन फ्रेमवर्क (FFI) के प्रावधानों के अनुरूप ‘आवाससॉफ्ट’ पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता और सुचारू मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सके।
जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिनांक 15 जून 2025 से 22 सितम्बर 2025 तक की अवधि में हुई दैवीय आपदाओं एवं अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों का सर्वेक्षण एवं पंजीकरण कार्य तत्काल ‘आवास+ 2024 मोबाइल ऐप’ पर पूर्ण किया जाए। साथ ही विकासखण्ड स्तरीय ‘आवास सॉफ्ट’ वेब पोर्टल से पंजीकृत परिवारों को “Special Project under PMAY-G” श्रेणी में चिह्नित (Marked) किया जाए और समस्त आवश्यक औपचारिकताएँ समयबद्ध रूप से पूरी की जाएं।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि यह विशेष परियोजना आपदा प्रभावित परिवारों के त्वरित एवं गरिमापूर्ण पुनर्वास की दिशा में राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि इस कार्य को पूर्ण संवेदनशीलता, तत्परता एवं पारदर्शिता के साथ समयसीमा में पूर्ण किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत और सुरक्षित आवास उपलब्ध हो सके।
Jaya punetha editor in chief ।




