मंगोली में गुलदार का आतंक: छात्र घरों में कैद, ग्रामीणों में भारी दहशत। गांव के जुनियर हाईस्कूल में पसरा सन्नाटा।

मंगोली में गुलदार का आतंक: छात्र घरों में कैद, ग्रामीणों में भारी दहशत। गांव के जुनियर हाईस्कूल में पसरा सन्नाटा।

मंगोली में गुलदार का आतंक: छात्र घरों में कैद, ग्रामीणों में भारी दहशत। गांव के जुनियर हाईस्कूल में पसरा सन्नाटा।

महिलाओं का जंगल जाना बंद • जनजीवन अस्त-व्यस्त • वन विभाग के तीन पिंजरे भी नाकाम। डीएफओ एवं एसीएफ ने किया घटनास्थल का निरीक्षण।

लोहाघाट। विकासखंड लोहाघाट के मंगोली क्षेत्र में बुधवार की शाम उस समय हड़कंप मच गया जब मजदूरी कर घर लौट रहे एक ग्रामीण पर गुलदार ने घात लगाकर हमला कर दिया। हमले में ग्रामीण की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय का माहौल गहराता जा रहा है। लोगों ने ऐतिहातन घरों से बाहर निकलना बेहद सीमित कर दिया है। गुलदार द्वारा हुए इस हमले के कारण क्षेत्र में अघोषित कर्फ्यू जैसा माहौल है। जो लोग बाहर निकल रहे हैं, वे भी समूह में ही जा रहे हैं। छात्र नहीं पहुंचे स्कूल आज छात्र भय के कारण स्कूल में नहीं पहुंचे। घटना के अगले ही दिन जूनियर हाई स्कूल मंगोली में शिक्षक तो पहुंचे, लेकिन एक भी छात्र नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार की गतिविधियां दिन में भी देखी जा रही हैं, ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा है।

महिलाओं का जंगल जाना बंद हो गया है तथा उनकी दिनचर्या प्रभावित हो गई है। हमले के बाद महिलाओं व मवेशियों का जंगल जाना बंद हो गया है। इससे चारा-पत्ती की कमी मवेशियों के लिए भोजन की समस्या, पानी के स्रोतों तक पहुंच में बाधा जैसी दिक्कतें बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार अक्सर मानव गतिविधियों वाले इलाकों में घूम रहा है, जिससे खतरा और बढ़ गया है। वन विभाग की कोशिशें जारी तीन पिंजरे असफल गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग ने क्षेत्र में तीन पिंजरे लगाए हैं, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। विभागीय टीमें लगातार गश्त कर रही हैं।

चंपावत डिवीजन का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे डीएफओ आशुतोष सिंह, एसडीओ सुनील कुमार, वनकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। ग्राम प्रधान उमेश राम और पूर्व ग्राम प्रधान चांद बोहरा ने बताया कि ग्रामीणों में भारी दहशत है। उनका कहना है—“गुलदार को कैद किए बिना क्षेत्र में सामान्य जीवन शुरू होने की कोई उम्मीद नहीं है।”

ग्रामीणों ने अधिक पिंजरे लगाने और रात्रि गश्त बढ़ाने की मांग की है। परिजनों को 6 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। वन क्षेत्राधिकारी एन. डी. पांडे ने बताया कि मृतक के परिवार को ₹6 लाख मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है, जिसमें से ₹1,80,000 रुपए उनकी खाते में भेज दिए हैं। राज्य सरकार द्वारा जंगली जानवरों के हमले में मृत्यु पर ₹10 लाख मुआवजे की घोषणा की गई थी, लेकिन नया शासनादेश विभाग को अभी प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए भुगतान पुराने नियमों के तहत ही किया जा रहा है। गांव में दहशत बनी हुई है पैदल रास्ते सुनसान है, लोग समूह में चलने को मजबूर हैं। शाम होते ही गांव वीरान नजर आता है। बच्चे घरों में बंद जंगल की तरफ किसी की आवाजाही नहीं। मवेशियों को खुले में छोड़ने से ग्रामीण बच रहे हैं। वन विभाग ने ग्रामीणों को अकेले न जाने और रात के समय घर से बिल्कुल न निकलने की सलाह दी है।

Jaya punetha editor in chief ।

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