तेंदुए की दहशत के बीच 30 वर्षीय जनप्रतिनिधि नैन सिंह की मिसाल—अकेले काट डाली लैंटाना की घनी झाड़ियाँ।

तेंदुए की दहशत के बीच 30 वर्षीय जनप्रतिनिधि नैन सिंह की मिसाल—अकेले काट डाली लैंटाना की घनी झाड़ियाँ।

बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता—पलायनग्रस्त गांव में श्रमदान कर दिया समाज को जागरूकता का संदेश।

चंपावत ।जहाँ पहाड़ों के कई ग्रामीण क्षेत्र पलायन के कारण सूने होते जा रहे हैं, वहीं पाटी विकासखंड की ग्राम पंचायत बांस-बसवाड़ी के युवा जनप्रतिनिधि नैन सिंह मेहता (30 वर्ष) ने सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है। क्षेत्र में बीते दिनों तेंदुए की बढ़ती आवाजाही से ग्रामीण और स्कूली बच्चे दहशत में थे। तेंदुआ गांव की बकरियों व दुधारू गाय को भी शिकार बना चुका था।

ऐसे माहौल में विद्यालय परिसर और रास्तों के आसपास फैली लैंटाना (कुर्री) की घनी झाड़ियाँ बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई थीं। बिना किसी सहायता की प्रतीक्षा किए नैन सिंह स्वयं कुदाल और दरांती लेकर मैदान में उतरे और विद्यालय मार्ग व परिसर की झाड़ियों को अकेले काटकर साफ कर दिया। उनके श्रमदान से बच्चों को राहत मिली और पूरे क्षेत्र में उनके प्रयास की सराहना हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सामूहिक श्रमदान की परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है, ऐसे समय में एक युवा जनप्रतिनिधि द्वारा जोखिम उठाकर आगे आना प्रेरक उदाहरण है।

प्रधानाध्यापक विनोद गिरी ने कहा, “युवा जनप्रतिनिधि का स्वयं आगे आकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बिना सरकारी मदद की प्रतीक्षा किए झाड़ियाँ उखाड़ना वास्तव में सराहनीय है।” नैन सिंह ने बताया कि आगे चलकर ग्रामीणों को साथ लेकर लैंटाना उन्मूलन का सामूहिक अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि गांव और विद्यालय परिसर सुरक्षित व स्वच्छ बन सकें।

Jaya punetha editor in chief ।

तेंदुए की दहशत के बीच 30 वर्षीय जनप्रतिनिधि नैन सिंह की मिसाल—अकेले काट डाली लैंटाना की घनी झाड़ियाँ।

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