पूर्वजों की विरासत नौलों एवं धारों को हर गांव में दिया नया जीवन- जिलाधिकारी
बुजुर्गों का कहना है की नौले एवं धारे हमारी सांस्कृतिक व धार्मिक परंपराओं के हैं संवाहक।
चंपावत। नौले एवं धारों के पीछे पर्वतीय जीवन की संस्कृति, प्रकृति, परंपरा एवं संस्कार छुपे हुए हैं। शताब्दियों से यह ग्रामीणों की प्यास बुझाने एवं संस्कारों के सशक्त माध्यम बने हुए हैं। गर्मियां आते ही जब लोग पीने के पानी के लिए तरस जाते हैं, तब परिवार के लोगों को अपने पूर्वजों की विरासत नौलों व धारों की स्वत: है याद आ जाती है । बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों ने पर्वतीय जीवन में जहां सरकार सड़क बिजली पानी स्कूल अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं को देकर पलायन कर चुके लोगों को पुनः अपनी माटी से जोड़ने का प्रयास कर रही है किंतु यहां व्याप्त जल संकट इस ओर उनके कदम रोक रहा है। पहले लड़की का ब्याह करने से पूर्व पिता उस गांव में जंगल नौले धारों को पहले देखा करते थे। नौले किसी भी गांव की समृद्ध परंपरा के एक हिस्सा हुआ करते थे। बदलते समय चक्र से अब लोगों को अपने पूर्वजों की याद आने लगी है। उनका कहना है कि हर गांव के नालों को पुनर्जीवित कर उन्हें सदाबहार बनाए रखने के लिए वहां भगवान के नाम पर दो-चार पानी के पोशक पौधे भी लगाऐ जाए ।
पूरी जिंदगी दिल्ली में बिताने के बाद नौले एवं धारे ने गुंमदेस के मडलक गांव के प्रकाश उपाध्याय को उनकी माटी से जोड़ दिया है। उनका कहना है कि भले ही हम शहर के चकाचौंध के बीच रहते थे, लेकिन पहाड़ का जैसा शुद्ध हवा पानी कहां मिलता है? ७२ वर्षीय रुक्मिणी देवी कहती है कि नौलों से हमारी संस्कृति जुड़ी हुई है। घर में नई दुल्हन आने तथा घर में नवजात शिशु के नामकरण के दिन पहले उन्हें नौले एवं धारे दिखाये जाते हैं। 75 वर्षीय हीरा देवी कहती हैं कि मुझे याद है जब मेरे पिताजी ने गांव में पानी से हर समय हरा भरा नौला वह आसपास जंगल देखकर ही मेरा विवाह किया था ७८ वर्षीय दयाकृष्ण, एवं ७५ वर्षीय टीकाराम पंत कहना हैं कि गांव के नौले, धारे हमारी संस्कृति संस्कार व परंपराओं के संवाहक हैं। उन्हें सुरक्षित एवं संरक्षित रखना ही हमारे पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।
मॉडल जिले के सभी नौलों व धारों को दिया जायेगा नया जीवन- जिलाधिकारी
चंपावत जिलाधिकारी मनीष कुमार का कहना है कि हर गांव में नौलों व धारों को नया जीवन देने के लिए जिला प्रशासन महत्वपूर्ण कार्य योजना बना रहा है। हर गांव के नौले धारों को पुनर्जीवित कर लोग इसके जल को किसी भी रूप में प्रयोग कर सकेंगे।