दूरस्थ क्षेत्र के लोग अब अधिकारियों से समस्याएं बताने चंपावत नहीं आएंगे, बल्कि अधिकारी ही उनसे मिलने प्रत्येक 15 दिन में जाएंगे बकोड़ा गांव। 

दूरस्थ क्षेत्र के लोग अब अधिकारियों से समस्याएं बताने चंपावत नहीं आएंगे, बल्कि अधिकारी ही उनसे मिलने प्रत्येक 15 दिन में जाएंगे बकोड़ा गांव।

दूरस्थ क्षेत्र के लोगों के चेहरों में मुस्कान लाए बगैर मॉडल जिले की परिकल्पना रह जाएगी अधूरी- जिलाधिकारी।

चंपावत। साधनो एवं सुविधाओं से दूर बकोडा गांव की सोना उगलने वाली यहां की भूमि ही लोगों को अपने पूर्वजों की विरासत से जोड़े हुए हैं, वरना यह गांव भी पलायन से पूरी तरह उजड़ गया होता। जिलाधिकारी मनीष कुमार के अफसरो के काफिले के साथ लंबी पैदल दूरी नाप कर यहां का किया गया दौरा, न केवल ग्रामीणों में भविष्य की आस जगा गया, बल्कि सड़क बनते ही यहां से पलायन कर चुके लोगों की घर वापसी होने का भी दरवाजा भी खुल गया है।दो दर्जन दूरस्थ गांवों का जिला पंचायत में प्रतिनिधित्व कर रहे_ शैलेश जोशी का कहना है कि जिस दिन बकोड़ा सहित अन्य गांव सड़क सुविधा से जुड़ जाएंगे उसी दिन यहां के गांवों में नई रौनक आने लगेगी। “क्विक एक्शन” वाले जिला अधिकारी का यह दौरा यहां विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोल गया है। ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा कहती हैं कि जब एक दिन पैदल खड़ी चढ़ाई पार करते गांव पहुंचने में सब की सांसे फूलने लगी हैं तो, जो लोग ऐसे परिवेश में जीवन बिता रहे हैं, उनकी कठिनाइयां का सुनकर अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है।उनका कहना था कि इस दूरस्थ क्षेत्र में लोगों को अब जिलाधिकारी के दौरे के बाद धीरे-धीरे देश की आजादी मिलने का एहसास होने लगेगा।

 

यहां के बीडीसी सदस्य मयंक बोहरा व ग्राम प्रधान रविंद्र रावत का कहना है कि यहां के लोगों के रोजमर्रा के जीवन में दिया- सलाई लेनी है तो 12 किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ता है। यदि दवा लेनी है तो 35 किलोमीटर दूर टनकपुर जाने की मजबूरी ने उन्हें पलायन के लिए विवश कर दिया है। बहरहाल जिलाधिकारी का यह दौरा निराश चेहरों में भविष्य की मुस्कान तो लाया है। “जिलाधिकारी के इस कथन ने ग्रामीणों का मन जीत लिया है कि यहां के लोग जिला मुख्यालय नहीं आ सकते हैं, मैं स्वयं यहां की समस्याओं के लिए शासन स्तर पर वकालत करता रहूंगा”, की बात ने ग्रामीण अपने भविष्य की आस पक्की मान रहे हैं। जिलाधिकारी ने गांव का दौरा करने के बाद बताया कि बगैर दूरस्थ क्षेत्र के लोगों के चेहरों में मुस्कान लाए हमारी चंपावत को आदर्श जिला बनाने का प्रयास अधूरा रह जाता। जिलाधिकारी ने बताया कि बकोड़ा गांव के लोगों ने जो भी छोटी-बड़ी समस्याएं बताई हैं, उसके परिणाम एक पखवाड़े के बाद से ही उन्हें दिखाई देने लगेंगे। अब यहां के लोगों को अपनी समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय में अधिकारियों से मिलने के बजाय हर 15 दिन में अधिकारी उनके पास आकर उनकी समस्या का समाधान करेंगे।

Jaya punetha editor in chief ।

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