मानेश्वर समाचार।
30 अगस्त 2025
चट्टान की तरह अडिग रहने वाले हिमवीरों की उस वक्त हो गई आंखें नम!
राष्ट्र की आन, बान और शान के लिए भूल जाते है, हम अपनी सारी सुख सुविधाये- उप सेनानी।
लोहाघाट। आईटीबीपी की 36वीं वाहिनी के चट्टान की तरह दृढ़ निश्चयई,कभी अपनी हार न मानने वाले तथा असंभव को संभव करने का मदद्दा रखने वाले हिमवीरों की उस समय आंखें नम हो गई, जब आईटीबीपी के गौरवशाली इतिहास को लिखने में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले उप सेनानी नारायण सिंह गरखाल के सेवानिवृत होने पर उन्हें विदाई दी जा रही थी। कमांडेंट संजय कुमार ने कहा उन्हें अपने एक ऐसे साथी को अपने बीच से विदा करते हुए भले ही हम अपने को असहज महसूस कर रहे हैं। लेकिन उनके अनुभव शौर्य पराक्रम तथा चट्टानी इरादो वाले अधिकारी की “सीख” हम सबको उनकी यादें रोज ताजा करती रहेगी। उन्होंने कहा श्री गरखाल ऐसे सीमावर्ती गांव के निवासी है जहां उनकी उपस्थिति एवं सेवा बिना वर्दी के राष्ट्र को देते हुए हम सबका मनोबल ऊंचा बनाए रखेंगे।श्री गरखाल ने अपने लंबे कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए कहा हमने ऐसे समय में सीमाओ में रहते हुए देश की रक्षा की है,जब साधनों एवं संसाधनों की कमी होने के बावजूद हमारा लक्ष्य तिरंगे की आन,बान और शान के लिए मर मिटने का हुआ करता था। जिसके सामने हम अपनी अन्य सारी कठिनाइयों को ही भूल जाया करते थे। उन्होंने जवानों एवं अधिकारियों से कहा वह आईटीबीपी के गौरवशाली इतिहास के पन्नों में अपने खून से अपनी शौर्य गाथाएं लिखते रहें। आइटीबीपी का “हिमवीर” बनना भाग्य का नहीं सौभाग्य की बात होती है।इस अवसर पर द्वितीय कमान अधिकारी बेगराज मीणा, सूबे सिंह, उप सेनानी मुकेश चंद,सहायक सेनानी अनिल कुमार, गौरव कुमार, जितेंद्र राणा, डॉअसरा, इंस्पेक्टर गोपाल वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किये। बटालियन परिवार की ओर से कमांडेंट ने श्री गरखाल को स्मृति चिन्ह भेंट किया तथा उनके सम्मान में सामूहिक भोजआयोजित किया गया।
Jaya punetha editor in chief ।



