चंपावत
*सरकार की योजनाओं से संवर रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था: पाटी के भगवान लाल बने मत्स्य पालन में आत्मनिर्भरता की मिसाल*
*चंपावत के सुदूर गाँव जौलाड़ी में मत्स्य पालन से बदली भगवान लाल की तकदीर, एक लाख रुपये की हुई अतिरिक्त आय*
*सरकारी प्रोत्साहन और इच्छाशक्ति का संगम: जौलाड़ी गाँव में नीली क्रांति ला रहे पशुपालक भगवान लाल*
उत्तराखंड के मा0 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों तक जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है।
सरकार की इन नीतियों का प्रत्यक्ष प्रभाव धरातल पर देखने को मिल रहा है, जहाँ ग्रामीण जन न केवल आत्मनिर्भर बन रहे हैं बल्कि अपनी आजीविका के साधनों को सशक्त कर आर्थिक समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
इसी स्वर्णिम क्रम में जनपद मुख्यालय चंपावत से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित विकासखंड पाटी का दूरस्थ ग्राम जौलाड़ी विकास की एक नई कहानी बयान कर रहा है।
यहाँ के निवासी और पेशे से पशुपालक श्री भगवान लाल ने पारंपरिक कार्यों के साथ-साथ मत्स्य पालन को अपनाकर अपनी आजीविका में अभूतपूर्व सुधार किया है।
श्री भगवान लाल की इस सफलता के पीछे मत्स्य पालन विभाग का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन और सहयोग रहा है।
विभाग की कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत उन्हें 60 प्रतिशत के अनुदान पर मत्स्य पालन हेतु तालाब उपलब्ध कराया गया।
इसके साथ ही, वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन सुनिश्चित करने के लिए उन्हें विभाग द्वारा समय-समय पर तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मत्स्य विभाग द्वारा उन्हें गुणवत्तापूर्ण मछली बीज और पौष्टिक चारा भी निःशुल्क उपलब्ध कराया गया।
विभागीय मार्गदर्शन और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर भगवान लाल ने विगत वर्ष में एक क्विंटल से भी अधिक मछली का रिकॉर्ड उत्पादन कर बाजार में विक्रय किया।
इस व्यवसाय से उन्होंने लगभग एक लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित की, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार आया है। आज भगवान लाल का परिवार न केवल आर्थिक रूप से सुदृढ़ हुआ है, बल्कि वे क्षेत्र के अन्य ग्रामीणों और पशुपालकों के लिए भी स्वरोजगार का एक उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत कर प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।




