जया पुनेठा
10 मई 2026
उत्तराखंड भारत के मुकुट हिमालय का वह नायाब नगीना है जिसके बारे मैं ऋषियों महर्षियों ने वेदों,शास्त्रों एवं उपनिषदों मैं बताया गया है कि यह क्षेत्र ही ज्ञान गंगा का उद्गम है।यही ज्ञान कालान्तर मैं समूचे विश्व में फैला है।विश्व के समस्त देशों के लोग अपने अपने धर्मों का ज्ञान भारत भूमि विशेषकर उत्तराखण से ही प्राप्त किया।हजार बारह सौ वर्षों की गुलामी ने कहीं विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालयों को आग के हवाले कर दिया,कई मठ मंदिरों को तहस नहस कर दिया,धर्म संस्कृति को नष्ट भ्रष्ट किया,जाती भाषा लिंग क्षेत्र में बांटने का कुकृत्य करके हमारे अंदर गुलामी की हीन भावना भर दिया।नारी सम्मान कहीं खो गया।जब की हमारी सभ्यता एवं संस्कृति समृद्धि की वाहक यही स्त्रियों ही रहीं हैं।उन्हें पढ़ने लिखने से वंचित रखा गया एवं पैर की जूती बना दिया गया।परिणाम स्वरूप हमें यह दुर्दिन देखना पड़ा। नशे और शराब के प्रचलन का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव उत्तराखंड राज्य पर ही पड़ा है,जब की हम इसे देवभूमि कहते है,आज यही राक्षस भूमि बन गयी है।शादी ब्याह,विभिन्न पार्टियों,वार्षिक समागम,जीत हार,खुशी ग़म,राजनैतिक कार्यक्रमों यहां तक कि मुण्डन संस्कार,उपनयन संस्कार,पूजा पाठ, रामलीला मंचन,नामकरण आदि की दावतों में शराब पीने पिलाने की परिपाटी आज कल स्टेटस सिम्बल बन गई है।कोई भी व्यक्ति तनिक समय निकाल कर सोचे कि हम अपने प्रदेश को कहां ले जा रहे हैं।अपनी शेखी बघारने के लिए हम सभी लोग कुछ भी कहें परन्तु उत्तराखंड को नीचे ले जाने में हम सभी भागीदार हैं।जिस शराब अथवा सुल्फा आदि के सेवन से व्यक्ति की स्मरण शक्ति घटती है,शरीर के विभिन्न तंत्र खराब हो जाते हैं,पैसा बर्बाद होता है,आम समाज में प्रतिष्ठा कम होती है,आयु क्षीण होती है,बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है,घमंड बढ़ता है,कामवासना उद्दंड रूप ले लेती है,ऐसे समाज द्रोही,राष्ट्र द्रोही कार्य लिप्त होने,इसका विरोध न करने,अथवा इसे बढ़ावा देने वाली सरकारों का साथ देकर हम कौन सा अपना,देश का,या आगे आने वाली नस्लों का भला कर रहे हैं। मेरा स्पष्ट मान ना है कि उत्तराखंड राज्य को गर्त में डालने के विभिन्न कारणों में नशे की लत,शराब का प्रचलन प्रथम पायदान पर है। सामाजिक संस्थाओं,धार्मिक संस्थाओं,न्यायविदों,राजनेताओं,शिक्षकों,विद्वतजनों,मातृशक्ति ,मठों मंदिरों के संचालकों, तथा समस्त राष्ट्र भक्तों से विनम्र अनुरोध है कि उत्तराखंड राज्य से ही शराब एवं नशा मुक्ति का एक जन आंदोलन प्रारम्भ करें और अपने देवभूमि के तमगे के लिए सार्थक पहल करें।
जय बद्री विशाल , जय केदारनाथ।
जया पुनेठा,चौक बाजार लोहाघाट चंपावत उत्तराखंड ।
Jaya punetha editor in chief ।



