*डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन से किसानों को डिजिटल सशक्तिकरण की नई राह, ‘फार्मर रजिस्ट्री’ से बनेगी यूनिक आईडी*।

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चम्पावत 28 फरवरी 2026

*डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन से किसानों को डिजिटल सशक्तिकरण की नई राह, ‘फार्मर रजिस्ट्री’ से बनेगी यूनिक आईडी*

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत जनपद चंपावत में किसानों के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

मिशन के प्रमुख घटक एग्रीस्टैक (AgriStack) के माध्यम से प्रत्येक किसान को आधार संख्या के अनुरूप एक विशिष्ट डिजिटल आईडी (यूनिक फार्मर आईडी) प्रदान की जाएगी।

जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस डिजिटल पहचान पत्र में किसान का व्यक्तिगत विवरण, स्वामित्व वाली भूमि, बोई गई फसल एवं अन्य कृषि संबंधी अभिलेख एकीकृत रूप से दर्ज रहेंगे।

इससे केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पात्र किसानों तक पहुंचाया जा सकेगा।

फार्मर रजिस्ट्री का उद्देश्य किसानों के समस्त डेटा को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित एवं व्यवस्थित करना है। इसके लिए ऑनलाइन वेब पोर्टल ukfr.agristack.gov.in तथा मोबाइल एप्लीकेशन विकसित किया गया है।

यह व्यवस्था विशेष रूप से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित अन्य कृषि सब्सिडी, ऋण एवं फसल बीमा योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगी।

पंजीकरण प्रक्रिया आधार प्रमाणीकरण (फिंगरप्रिंट, फेस ऑथेंटिकेशन अथवा ओटीपी) के माध्यम से की जाएगी। राज्य स्तर पर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी एवं मुख्य कृषि अधिकारी की यूजर आईडी सृजित की जा चुकी है।

मुख्य कृषि अधिकारी अपने अधीनस्थ ऑपरेटरों की आईडी बनाएंगे, जबकि तहसील स्तर पर राजस्व उपनिरीक्षक एवं लेखपाल सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण करेंगे। लेखपाल द्वारा सत्यापित अभिलेखों को संबंधित तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार द्वारा अंतिम अनुमोदन प्रदान किया जाएगा।

इस पहल के माध्यम से पात्र कृषकों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की निर्बाध आर्थिक सहायता प्राप्त होगी, योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, सटीक आंकड़ों के आधार पर प्रभावी कृषि नीतियों का निर्धारण संभव होगा तथा किसानों में तकनीकी जागरूकता एवं डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

पंजीकरण के समय किसानों को अपना आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर तथा भूमि संबंधी अभिलेख (खसरा/खतौनी/जमाबंदी) साथ रखना अनिवार्य है।

जिला प्रशासन ने सभी किसानों से अपील की है कि वे इस डिजिटल मुहिम का हिस्सा बनकर अपनी यूनिक फार्मर आईडी शीघ्र बनवाएं, ताकि भविष्य में संचालित समस्त शासकीय योजनाओं एवं कल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ बिना किसी बाधा के प्राप्त किया जा सके।

Jaya punetha editor in chief ।