मानेश्वर समाचार।
चम्पावत 23 अगस्त 2025
*35 हज़ार के लोन से बदली निर्मला देवी की जिंदगी, अब प्रतिमाह 10 हज़ार की आमदनी*
माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के महिला सशक्तिकरण के संकल्प का प्रत्यक्ष उदाहरण अब जनपद चंपावत के हर गाँव में देखा जा सकता है। राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों, ग्रामोत्थान परियोजना और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएँ न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज की आर्थिक मजबूती में भी अहम योगदान दे रही हैं।ग्राम सभा भींगराड़ा की श्रीमती निर्मला देवी, शीला देवी महिला स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। कभी आर्थिक तंगी और परेशानियों से घिरा उनका परिवार अब आत्मनिर्भरता और खुशहाली की राह पर है। पहले गुज़ारा थोड़ी बहुत खेती से होता था, लेकिन आय इतनी कम थी कि बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च पूरा कर पाना कठिन था।ग्रामोत्थान परियोजना की “अल्ट्रापुअर योजना” से निर्मला देवी को ₹35,000 का ब्याजमुक्त लोन स्वीकृत हुआ। इस राशि से उन्होंने एक अच्छी नस्ल की गाय खरीदी। यही निर्णय उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।आज निर्मला देवी की गाय प्रतिदिन 10 से 12 लीटर दूध देती है। वह दूध को सीधे बाजार में बेचती हैं और उसका घी बनाकर भी अतिरिक्त आमदनी करती हैं। 50 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से अब वह प्रतिमाह ₹10,000 से ₹12,000 तक की आमदनी कर रही हैं। इस आय से परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।अब परिवार की जरूरतों के साथ ही निर्मला देवी कुछ आय बचत में भी लगाने लगी हैं। उनके मन में अब भविष्य को लेकर आत्मविश्वास और स्थिरता है। वह जल्द ही एक और भैंस खरीदने की योजना बना रही हैं, ताकि अपनी आमदनी और बढ़ा सकें।निर्मला देवी का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। जहाँ पहले वह परिवार की जिम्मेदारी पूरी करने में असहाय महसूस करती थीं, वहीं आज वह परिवार का एक मजबूत आर्थिक सहारा बन चुकी हैं।निर्मला देवी जैसी अनेक महिलाएँ आज ग्रामोत्थान परियोजना और महिला समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। यह बदलाव केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी महिला सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। अब गाँव की महिलाएँ अपने निर्णय खुद ले रही हैं और परिवार के साथ-साथ समाज में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
Jaya punetha editor in chief ।




