रीठा साहिब लधियाघाटी घाटी में उच्च शिक्षा का सूखा, पलायन को मजबूर छात्राएं।

रीठा साहिब लधियाघाटी घाटी में उच्च शिक्षा का सूखा, पलायन को मजबूर छात्राएं।

75 किलोमीटर के दायरे में डिग्री कॉलेज नहीं, 2019 की घोषणा फाइलों में कैद।

लोहाघाट। श्रीरीठासाहिब लधियाघाटी क्षेत्र में उच्च शिक्षा का अभाव अब सामाजिक संकट का रूप ले चुका है। लगभग 75 किलोमीटर के दायरे में एक भी डिग्री कॉलेज न होने से यहां के गांवों से लोक पलायन तेज होता जा रहा है। सबसे अधिक प्रभावित वे छात्राएं हैं, जो पढ़ना तो चाहती हैं, लेकिन डिग्री कॉलेज न होने के कारण उनके सपने अधूरे रह जाते हैं।

लधियाघाटी के साथ ही इसके पार नैनीताल जनपद के अधोडा, पदमपुर, अमजद, सुआकोट पोखरी, खेड़ा, नौलिया गांव, बजवाल गांव सहित अनेक गांवों के छात्र-छात्राओं के सामने भी उच्च शिक्षा की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। टांण, मछीयाण, रमक, भीगराडा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे वर्षों से इसी पीड़ा को झेलते आ रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन टिटगाई, सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रशेखर जोशी, दयाकृष्ण शर्मा, पूर्व प्रधान जगदीश सिंह, सहित क्षेत्र के गणमान्य लोगों का कहना है कि डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए ग्रामीण अपनी भूमि देने को पूरी तरह तैयार हैं। रीठा साहिब के पुराने जीआईसी परिसर में आज भी जीआईसी की संपत्ति मौजूद है, जबकि इंटर कॉलेज को अन्यत्र स्थानांतरित किया जा चुका है। इस परिसर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और लोग अतिरिक्त भूमि दान देने को भी तैयार हैं।

इसी प्रकार भिगराडां–गडयुरा के काठतोली तोक में भी ग्रामीणों ने भूमि देने की सहमति जताई है। क्षेत्रवासियों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि वर्ष 2019 में यहां डिग्री कॉलेज खोलने की बाकायदा घोषणा की गई थी, लेकिन उसके बाद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा यह है कि घाटी की बालिकाओं में पांच प्रतिशत भी उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर पा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र डिग्री कॉलेज की स्थापना नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में यह पूरा क्षेत्र शिक्षा से और अधिक पिछड़ जाएगा और पलायन की रफ्तार और तेज हो जाएगी।

Jaya punetha editor in chief ।

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