बाराही धाम में मां बज्र बाराही का ऐसा भव्य और दिव्य मंदिर बनेगा, जो उत्तर एवं दक्षिण भारत के लोगों को अपनी ओर करेगा आकर्षित – हीरा बल्लभ जोशी

श्री बाराही मंदिर ट्रस्ट के अस्तित्व में आने के बाद परिसर में राजनैतिक गतिविधियां पर लगी रोक, पूर्ण नशा मुक्त किया गया परिसर ।
चंपावत। बाराही धाम में उत्तर भारत का मां बज्र बाराही का ऐसा पहला भव्य व दिव्य मंदिर बनेगा जो यहां के पुरातन सांस्कृतिक स्वरूप को पुनर्जीवित कर ऐसी आस्था एवं मां बाराही की विराट शक्ति का ऐसा केंद्र बनेगा जो देश के उत्तरी व दक्षिणी भू – भाग के श्रद्धालुओं की आस्था को अपनी ओर आकर्षित करेगा। यहां लगभग 15 करोड रुपए लागत से बनने वाले मंदिर में कुमाऊं के हर घर की आस्था को शामिल किया जाएगा। वहीं उत्तराखंड के मां बाराही के विभिन्न क्षेत्रों में सेवारत अधिकारियों एवं नागरिकों ने इसमें अपने अनुभव, ज्ञान का समावेश करने की इच्छा जताई है। पहली बार बाराही धाम को विश्व के लोगों से जोड़ने के लिए श्रीबाराही शक्तिपीठ ट्रस्ट की स्थापना की गई है। इसके पहले अध्यक्ष के रूप में धर्म-कर्म पर अपनी गहरी पैठ, पारंपरिक आस्था, कई धार्मिक पुस्तकों के लेखक एवं मां बाराही की गोद में पले रेलवे कॉरिडोर के पूर्व महानिदेशक हिरा बल्लभ जोशी को पहला अध्यक्ष बनाया गया। जिनके द्वारा तीन साल पूर्व ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद जी महाराज एवं अन्य दिव्य महात्माओं की उपस्थिति में यहां विश्व कल्याण महायज्ञ की शुरुआत की थी। यहां गुजरात के सोमपुरा के मंदिर शील्पीयों द्वारा मंदिर को आकर्षक शक्ल दी जाएगी। नागर शैली में बनने वाले इस मंदिर को ऐसे रूप में डिजाइन किया गया है कि यहां सूर्य भगवान अपनी पहली किरण से मां बाराही का अभिषेक करेंगे।
ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री जोशी ने बताया कि श्रीबाराही शक्तिपीठ ट्रस्ट अस्तित्व में आ गया है तथा यहां ट्रस्ट के नियमों को कड़ाई से लागू कर दिया गया है। ट्रस्ट की परिधि में हनुमान मंदिर से परिक्रमा मार्ग एवं डुंडी विनायक से मचवाल तक का पूरा क्षेत्र शामिल किया गया है जिसमें किसी प्रकार की राजनैतिक गतिविधियां नहीं होगी। गैर राजनैतिक कार्यों के लिए ट्रस्ट की बाकायदा अनुमति एवं निर्धारित शुल्क को जमा करना होगा। अलबत्ता निर्धन कन्याओं के विवाह एवं यज्ञोपवीत संस्कार जैसे कार्यक्रम को निशुल्क सुविधा दी जाएगी। पूरे परिसर को नशा मुक्त एवं साफ सुथरा रखा जा रहा है। श्री जोशी का कहना है कि इस मंदिर का भावी रूप एवं स्वरूप ऐसा होगा जहां उत्तर एवं दक्षिणी भारत के लोगों की यहां आवाजाही शुरू होने के साथ यह कुमाऊं क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मालामाल कर देगा। वर्तमान में मंदिर परिसर में ट्रस्ट का कार्यालय स्थापित कर दिया गया है। ट्रस्ट के सचिव के रूप में मंदिर कमेटी के संस्थापक अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह लमगड़िया अपनी सेवाएं दे रहे हैं। श्री लमगड़िया का कहना है कि वे अपना शेष जीवन मां बाराही की सेवा में ही समर्पित करेंगे।
Jaya punetha editor in chief ।



