नेपाल सीमा से लगे सीमावर्ती गांव के समग्र विकास के लिए अधिकारियों ने सौंपी अपनी रिपोर्ट ।

 मानेश्वर समाचार।

3 जुलाई 2025

नेपाल सीमा से लगे सीमावर्ती गांव के समग्र विकास के लिए अधिकारियों ने सौंपी अपनी रिपोर्ट।

 

वाइब्रेंट विलेज में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रोजगार, पलायन पर करें ध्यान केंद्रित- जिलाधिकारी

 

चंपावत। नेपाल से लगी 80 किलोमीटर की लंबी सीमा में पलायन रोकने, रोजगार की संभावनाओं को जमीनी रूप देने एवं सीमावर्ती लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आज जिलाधिकारी मनीष कुमार द्वारा सीमा से लगे गांव में भेजी अधिकारियों की अलग-अलग टीमों द्वारा किए गए अध्ययन पर चिंतन व मंथन किया गया।

जिलाधिकारी को कहना था कि सीमावर्ती गांव को सशक्त व समृद्ध करने के लिए वहां बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाना आवश्यक है। अधिकारियों के दल द्वारा स्थानीय संसाधनों के दोहन,आपदाओं का स्थाई समाधान, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देते हुए उनके लिए बाजार की व्यवस्था, ग्रामीण संपर्क मार्गों का निर्माण कर पलायन रोकने, बहुद्देशीय भवनो का निर्माण, सड़कों की व्यवस्था, सोलर चैन,लिंक फेंसिंग, कृषि बागवानी, लघु सिंचाई, कौशल विकास के लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधन केंद्र, पुस्तकालय की स्थापना, पंचायत भवनों को मिनी सचिवालय का रूप देने का सुझाव दिया गया है।

अधिकारियों द्वारा चयनित पासम, मढ़वा,तरकुली, आमनी, कालीगुठ, तामली, पोलप, देवीपुरा,सैलानी गोठ नायक गोठ, चूका गांव का दौरा कर ग्रामीणों से संवाद कर कार्यक्रम निर्धारित किया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए वहां के किसानों को कम भूमि में अधिक उत्पादन की तकनीक, दुधारू पशु पालन एवं पारंपरिक खेती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। बैठक में सीडीओ डॉ .जीएस खाती, सीएमओ डॉ. देवेश चौहान, सीईओ मेहरबान सिंह, एलबीओ एएस ग्वाल, डी डीओ डी एस दिगारी आदि मौजूद थे।

 

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अधिकारियों को नजर नहीं आई मौनपालन की संभावनाएं।

 

चंपावत। सीमावर्ती गांव की जलवायु व परिस्थितिया मौनपालन के लिए सर्वथा उपयुक्त होने के कारण यहां यह कार्यक्रम कुटीर उद्योग के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन सीमा के इक्ग्यारह गांव के सर्वेक्षण में गए अधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को ही नजरअंदाज कर दिया। इससे लगता है या तो सर्वेक्षण में दिलचस्पी नहीं ली गई या इसे हवाई रूप दिया गया है।

Jaya punetha editor in chief ।

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