पारंपरिक कारीगरी को नई पहचान : लोहाघाट का लौह शिल्प बना आत्मनिर्भता की मिसाल।

मानेश्वर समाचार।

19 जून 2025

 

*पारंपरिक कारीगरी को नई पहचान: लोहाघाट का लौह शिल्प बना आत्मनिर्भरता की मिसाल*

 

*लोहाघाट का लौह शिल्प: ग्रोथ सेंटर बना समृद्धि का आधार, दुनिया भर में गूँज रही पारंपरिक कला की ध्वनि*

 

चंपावत की सांस्कृतिक धरोहर, लोहाघाट का पारंपरिक लौह शिल्प, अब पुनः अपने गौरव की ऊँचाइयाँ छू रहा है।

 

इसके पीछे है चंपावत के लोहाघाट ग्रोथ सेंटर की उल्लेखनीय पहल, जिसने न केवल इस विलुप्त होती कला को पुनर्जीवित किया बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया।

 

पारंपरिक कारीगरी को नई पहचान :  लोहाघाट का लौह शिल्प बना आत्मनिर्भता की मिसाल।

*पारंपरिक शिल्प, आधुनिक राह*

 

लोहाघाट का लौह शिल्प अपनी सदियों पुरानी कलात्मक परंपरा और विशिष्ट डिज़ाइन के लिए जाना जाता है। समय के साथ विपणन अभाव और आधुनिक प्रतिस्पर्धा के चलते यह शिल्प मंद पड़ने लगा था। ऐसे समय में ग्रोथ सेंटर का स्थापना एक निर्णायक कदम सिद्ध हुआ।

 

यह केंद्र न केवल कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण का माध्यम बना, बल्कि कारीगरों को आधुनिक डिज़ाइन और बाज़ार की माँग के अनुरूप ढलने का अवसर भी प्रदान करता है।

 

पारंपरिक कारीगरी को नई पहचान :  लोहाघाट का लौह शिल्प बना आत्मनिर्भता की मिसाल।

*तकनीक, प्रशिक्षण और टूल्स का संयोजन*

 

ग्रोथ सेंटर ने कारीगरों को आधुनिक औजार, उच्च गुणवत्ता वाली वर्कशॉप सुविधाएं, डिज़ाइन प्रशिक्षण, और बाज़ार की नवीनतम प्रवृत्तियों से जोड़ा। इससे उनके उत्पादों की फ़िनिशिंग, कार्यक्षमता और सौंदर्य में जबरदस्त सुधार आया।

 

*बाज़ार से सीधा जुड़ाव और ब्रांडिंग*

 

ग्रोथ सेंटर ने स्थानीय उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, राष्ट्रीय मेलों और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुँचाया। साथ ही, लोहाघाट लौह शिल्प को एक विशिष्ट ब्रांड पहचान भी मिली, जिससे बाज़ार में इसकी माँग तेजी से बढ़ी।

 

*वित्तीय सहयोग और आत्मनिर्भरता की ओर कदम*

 

कारीगरों को सहज शर्तों पर ऋण और वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई गई, जिससे वे कच्चे माल की आपूर्ति, उत्पादन विस्तार और नए प्रयोग करने में समर्थ हो सके।

 

*साझा मंच, साझा सफलता*

 

ग्रोथ सेंटर एक ऐसा मंच भी बन गया है जहाँ कारीगरों के बीच ज्ञान-साझाकरण और सहयोग को बढ़ावा मिला। यह सामुदायिक भावना शिल्प के विकास की कुंजी बनी।

 

*वैश्विक मंच पर उत्तराखंड की पहचान*

 

आज लोहाघाट के कारीगरों द्वारा बनाए फूलदान, मूर्तियाँ, सजावटी सामग्री और घरेलू उपयोग की वस्तुएँ न केवल देशभर में लोकप्रिय हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी सराही जा रही हैं। टिकाऊपन, सौंदर्य और शिल्पकौशल की वजह से इन उत्पादों की माँग बढ़ी है।

 

*अधिकारियों का लक्ष्य और प्रतिबद्धता*

 

ग्रोथ सेंटर से जुड़े अधिकारियों का कहना है — हमारा उद्देश्य केवल उत्पादों को बाजार तक पहुँचाना नहीं, बल्कि लोहाघाट के हर कारीगर को आत्मनिर्भर बनाना और इस पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान दिलाना है।

Jaya punetha editor in chief ।

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