जगतजननी मां शारदा जी की 173वीं जयंती अद्वैत आश्रम मायावती में श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाई गई।

जगतजननी मां शारदा जी की 173वीं जयंती अद्वैत आश्रम मायावती में श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाई गई।

स्वामी दिव्य कृपानंद जी ने प्रवचन में कहा— त्याग और समर्पण से ही मिलता है समाज में सम्मान।

लोहाघाट। अद्वैत आश्रम मायावती में आज मां शारदा जी की 173वीं जयंती बड़े भक्ति भाव, पूर्ण श्रद्धा और दिव्यता के साथ मनाई गई। मां शारदा, जिन्होंने अपने वात्सल्य, करुणा और मातृत्व से संपूर्ण मानवता को अपनी बाहों में समेटा, आज भी जगत जननी के रूप में आध्यात्मिक जगत को आलोकित कर रही हैं।

कार्यक्रम के मुख्य प्रवचन में विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक पत्रिका ‘प्रबुद्ध भारत’ के विद्वान संत स्वामी दिव्य कृपानंद जी महाराज ने कहा कि जब व्यक्ति घर बार का मोह त्यागकर सन्यास जीवन अपनाता है तो उसके त्याग, अनुशासन और समर्पण के कारण ही समाज में उसे सम्मान मिलता है।

उन्होंने नर्मदा नदी का उदाहरण देते हुए कहा कि नर्मदा पूजा से पहले कन्या पूजन का विधान है क्योंकि मानसिक विकारों के समाप्त होने के बाद ही मनुष्य के अंतर्मन का ब्रह्म जागृत होता है।

महाराज ने अपने प्रवचन में मां शारदा के जीवन से कई प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख किया और कहा कि उनका जीवन करुणा, मातृत्व और धैर्य का अनुपम उदाहरण है। इससे पूर्व आश्रम के व्यवस्थापक सुहृदानंद, ‘प्रबुद्ध भारत’ के उप संपादक स्वामी ज्ञानेशानंद, चिकित्सा प्रभारी स्वामी एकदेवानंद, स्वामी एकविद्यनंद, स्वामी आत्मप्रकाशानंद सहित अन्य संतों ने उपस्थित भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया।

कार्यक्रम में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी भगवत प्रसाद पांडे, पूर्व जीसी अमरनाथ वर्मा, लखनऊ मेडिकल कॉलेज के प्रो डॉ नितिन रंजन गुप्ता, डॉ शशि, शिव गुप्ता, विपिन गुप्ता, देवीधुरा के राजेंद्र बिष्ट, मां बाराही के भुवन पुजारी, शिक्षक धर्म सिंह अधिकारी, त्रिभुवन उपाध्याय, कमल राय, राजकीय पीजी कॉलेज के डॉ. प्रकाश लखेड़ा, मनीष जुकरिया, नागेंद्र जोशी, कीर्ति बगोली सहित बड़ी संख्या में युवा व श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में भंडारा आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

प्राथमिक विद्यालय फोर्थी व सिरमोली के बच्चे भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

Jaya punetha editor in chief ।

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