हिमालय की महिलाओं के चेहरों पर मुस्कान लाने वाली ‘प्रतिभा दीदी’ — दक्षिण भारत की इंजीनियर ने बदली चम्पावत की तस्वीर।

हिमालय की महिलाओं के चेहरों पर मुस्कान लाने वाली ‘प्रतिभा दीदी’ — दक्षिण भारत की इंजीनियर ने बदली चम्पावत की तस्वीर।

500 पहाड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बना कर स्थापित किया सशक्तिकरण का अनोखा मॉडल।

लोहाघाट। दक्षिण भारत के बेंगलुरु की युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रतिभा कृष्णा नैया आज चम्पावत की महिलाओं के लिए प्रेरणा और स्वाभिमान की मिसाल बन चुकी हैं। वर्ष 2014 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के यूथ फोर इंडिया कार्यक्रम के तहत जब प्रतिभा पहली बार खेतीखान पहुँचीं, तब न गांव परिचित था, न लोग। अकेले हजारों किलोमीटर दूर पहाड़ के इस क्षेत्र में उन्होंने 29 वर्ष की उम्र में वह काम शुरू किया, जिसे आज पूरा क्षेत्र सलाम कर रहा है।

प्रतिभा ने पहाड़ की घूंघट में सिमटी महिलाओं को बाहर निकालकर रोज़गार, सम्मान और आत्मविश्वास से जोड़ने का मिशन शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन से आज 500 से अधिक महिलाएं ‘Himalayan Bloom’ के माध्यम से हैंडलूम व हस्तकला से स्वरोजगार अर्जित कर रही हैं। यहां तैयार उत्पाद न सिर्फ देश में, बल्कि विदेशों तक पहुंच रहे हैं। अमेरिका के न्यू जर्सी से आए जोगिंदर कुंडा ने भी इस पहल को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम योगदान दिया।

आज प्रतिभा ने खेतीखान के साथ-साथ लोहाघाट, पाटी और चम्पावत में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए हैं। उनकी सादगी, व्यवहार और समर्पण ने उन्हें हर घर की ‘प्रतिभा दीदी’ बना दिया है। पहाड़ों के संघर्ष में उलझी महिलाओं के चेहरों पर जो मुस्कान आज दिख रही है—वह प्रतिभा के जज़्बे की सबसे बड़ी पहचान है।

Jaya punetha editor in chief ।

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